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क़ब्र के पहले 24 घंटे | AI चित्रित क़यामत का दिन रृंखला |⁠ - एपिसोड 1

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हम एक brand new series शुरू कर रहे हैं जो artificial intelligence से बनाई गई है। क़यामत का दिन। क़ब्र की ज़िंदगी! मुझे यहाँ से बाहर निकालो! मन-रब्बुका? तुम्हारा रब कौन है? मुझे यहाँ से बाहर निकालो! दुनिया का अंत, क़यामत का दिन और जन्नत और जहन्नुम! Step by step, हम मौत के बाद की ज़िंदगी को इस तरह explore करेंगे जैसे हम उन क्षणों को जी रहे हों। मौत से ठीक पहले के अंतिम seconds में क्या होगा? कब्र के अंदर हम किस चीज़ का सामना करेंगे? जब दुनिया का अंत होगा या जब हम पुनर्जीवित होकर महान सभा में इकट्ठे होंगे, तो हम क्या अनुभव करेंगे? जन्नत और जहन्नुम में इंसानियत के लिए क्या इंतज़ाम है?

मौत के बाद की अनंत यात्रा के बारे में आपके सभी सवालों के जवाब इस सीरीज़ में हैं। अब, अगर आप तैयार हैं, तो चलिए शुरू करते हैं। मौत का लम्हा आख़िरकार आज वो दिन आ गया जिससे आप पूरी ज़िंदगी भागते रहे। आप उस दिन के लिए जागते हैं, जिसके बारे में आप कभी सोचना भी नहीं चाहते थे। और अब, मौत का फ़रिश्ता आपके लिए आ रहा है। स्याह काली रात। यह भोर से ठीक पहले का समय है। आपकी छाती का दर्द आपको कुचल रहा है। आपका शरीर हिल नहीं पा रहा। आपका मन अशांत है। आपका बचपन, आपकी किशोरावस्था और आप जो अभी हैं, एक झटके में आपकी आंखों के सामने आ जाते हैं। आप साँस लेते हुए हाँफ रहे है। आपके होंठ सूखे हैं। गला ऐसा महसूस होता है कि शायद उसमे कुछ फँसा हुआ हो। ये मुझे क्या हो रहा है?

कुछ समझ नहीं आ रहा। आप भयभीत है। आप समझ नहीं पा रहे है कि आख़िर हो क्या रहा है। अचानक आपके प्रियजन आपके चारों ओर इकट्ठा होते हैं। उनमें से एक आपका हाथ कसकर पकड़ रहा है। अन्य अपनी आँखों में आंसू लिए दुआएं कर रहे हैं। कोई आपको पानी पिलाने की कोशिश कर रहा है, उनके हाथ कांप रहे हैं। उनके चेहरों पर एक असहाय दुख है और आँखों में एक मौन विदाई है। दूसरी ओर आपको लगता है कि समय धीमा हो रहा है। आवाज़ें मंद पड़ रही हैं। ऐसा लगता है जैसे दुनिया चुपचाप आपको जाने दे रही है। जैसा कि आयत कहती है: हर नफ़्स को मौत का मज़ा चखना है और फिर तुमसब हमारी ओर वापस लौटोगे। आपका मन धुंधला हो रहा है। आपकी movements slow हो रही हैं। आपके गले में फंसी सांस आपके पूरे शरीर को लकवाग्रस्त कर रही है। उस लम्हे में आपके मन में केवल एक विचार है। आपकी एकमात्र चिंता है कि मेरे मरने के बाद क्या होगा?

और अब शैतान के अंतिम हमले शुरू होने वाले हैं। यही वह क्षण है जो 'सक़रतुल मौत (سَكَرَةُ الْمَوْت)' कहलाता है। मौत की पीड़ाएँ। क्या आप अपनी आस्था पर टिक सकेंगे? क्या आप अपने इमान को बचा पाएंगे या आप भी उन लोगों में से हो जाएँगे जो अपनी अंतिम सांस में इसे खो देते हैं? आपके मांसपेशियों की ताकत खो रही है। आपके हाथ, आपकी बाहें और पैर ठंडे हो रहे हैं। आपकी त्वचा का रंग फीका हो रहा है, पीला हो रहा है और उस समय शैतान आपके पास आता है। पैगंबर अलैहिस्सलाम ये दुआ मांगा करते थे - ऐ अल्लाह!

मैं तुझसे मौत के समय शैतान द्वारा गुमराह होने से पनाह माँगता हूँ। उस समय शैतान की सबसे बड़ी इच्छा यह सुनिश्चित करना है कि आप अपनी कब्र में बिना ईमान के दाखिल हों। इसलिए वह अपनी आखरी चाल अंतिम समय के लिए बचाए रखता है। हो सकता है वह आप पर किसी अन्य धर्म को अपनाने के लिए दबाव डाले । या वह आपसे अल्लाह के खिलाफ कोई कुफ़्रिया अल्फ़ाज़ कहलवाने की कोशिश करे। वह फुसफुसाएगा: वे लोग काफ़ी देर से तुम्हारे ठीक होने के लिए दुआ कर रहे है। लेकिन ख़ुद को देखो, तुम्हारी तबीयत और ख़राब होती जा रही है। अब कहाँ है अल्लाह? क्या तुम्हें सच में लगता है कि वह तुम्हें सुनता है?

पहले भी कई लोग इस क्षण से गुजर चुके हैं। प्रत्येक अपने तरीके से और अब आपकी बारी है। ज़रा इसके बारे में सोचिए। यहाँ तक कि पैगंबर अलैहिस्सलाम ने भी अल्लाह से उन्हें इससे सुरक्षित रखने की दुआ माँगी थी। क्या इतना काफी नहीं है? वास्तव में आपका इमान जितना मज़बूत होगा, मौत के समय आप उतनी ही मज़बूती से जवाब देंगे। कहते हैं आप वैसे ही मरते हैं जैसे आप जीते हैं। मौत के समय हमारी ज़ुबान वही बोलेगी जो हमने जिंदगीभर अपनी रूह में भरा होगा। अरे नहीं!

मैं दुनियावी ज़िंदगी के धोखे में था। वो जिसने अपनी आत्मा को सांसारिक इच्छाओं से भरा होगा, मौत के समय वह केवल वही बात करेगा। मेरा पैसा, मेरी दौलत...मेरी शोहरत लेकिन एक मोमिन जिसने अपने दिल में अल्लाह के प्यार के साथ ज़िंदगी बिताई होगी, वह अपने रब को ही याद करेगा और पुकारेगा। या रब्ब या लतीफ या रहमान या अल्लाह। हो सकता है आप कहें, लेकिन मैं तो पहले से ही ईमान वाला हूँ। जबकि, जिसकी आपको ज़रूरत है वह एक ऐसा इमान है जो आपके दिल में गहराई से जुड़ा हो और आपके दिमाग़ द्वारा पूरी तरह से स्वीकृत हो। इसे इस तरह से सोचें; मेरे हाथ में एक सेब है और एक चोर इसे किसी भी हाल में मुझसे छीनने की कोशिश कर रहा है। अगर मैं इसे केवल अपने हाथ में पकड़कर रखूँ, भले ही मैं इसे जितना हो सके सुरक्षित रखने की कोशिश करूँ, वह इसे आसानी से छीन सकता है। लेकिन अगर मैं इसे खा लूँ और इसे अपने अंदर पचा लूँ तो चोर के लिए इसे मुझसे छीनना नामुमकिन हो जाएगा। इसलिए अगर आप इमान की सच्चाइयों को सिर्फ अपने हाथ में पकड़कर न रखें, बल्कि उन्हें अपने दिल, मन और रूह में उत्तर जाने दें, तो अल्लाह की अनुमति से शैतान आपको मृत्यु के समय किसी भी तरह से हानि नहीं पहुंचा पाएगा। लेकिन अगर आप दावा करते हैं कि आप आख़िरत में यक़ीन रखते हैं, फिर भी आप ऐसे जीते हैं जैसे उसका अस्तित्व हो न हो। अगर आपकी कथनी और करनी में अन्तर है तो शायद अब यही समय है अपने आप से सवाल करने का। ये मामला आख़िरत में कामयाब और नाकाम होने का है। और आप अभी भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे है?

तो, मौत के समय और क्या कुछ होगा? आयत कहती है- जिन लोगों ने कहा कि "हमारा रब अल्लाह है।" फिर इस पर दृढ़तापूर्वक जमे रहे, उनपर फ़रिश्ते उतरते है ये कहते हुए कि "न डरो और न शोकाकुल हो, और उस जन्नत की खुशखबरी लो जिसका तुमसे वादा किया गया है। फ़रिश्ते नेक मोमिन के पास नूरानी, सुंदर चेहरों के साथ आते हैं, बिल्कुल सफेद कपड़े पहने हुए और एक मनमोहक ख़ुशबू लेकर। लेकिन वो जिसने बिना ईमान के ज़िंदगी गुज़ारी, यह उसके लिए एक दर्दभरा पल है। उसे अब उस चीज़ का सामना है जिसका वो इंकार किया करता था। नहीं! नहीं प्लीज़! मेरे पास मत आओ। दूर रहो। मैं ईमान लाता हूँ। मैं ईमान लाता हूँ कि अल्लाह सच है। प्लीज़! मुझे बस एक और मौक़ा दे दो। मेरे दोस्त कहाँ है? कहाँ है मेरे यार? क्या कोई नहीं जो मुझे बचाये?

लेकिन उस इंसान के लिए, ये तो असली डर की केवल शुरुआत है। चलिए, अब बात करते है कि - मरने के बाद क्या होता है?

मौत अंत नहीं है। यह अस्तित्वहीनता नहीं है। यह केवल एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन है। यह एक घर छोड़कर दूसरे घर में प्रवेश करने जैसा है। ये एक अलग दुनिया की शुरुआत है। वो अल्लाह जो हर सर्दी में पृथ्वी को मारता है और हर गर्मी में उसे फिर से ज़िंदा करता है। वही सभी इंसानों को मौत देता है ताकि वह उन्हें क़यामत के दिन फिर से ज़िंदा करे। और वह स्थान जहां हम सभी आख़िरत से पहले रहेंगे उसे बरजख की दुनिया कहा जाता है। हमारे पैगंबर अलैहिस्सलाम ने कहा: "कब्र या तो जन्नत के बगीचों में से एक बगीचा है या आग के गढ़ों में से एक गढ़ा।" हाँ, अब आप मर चुके हैं। आपके बेजान शरीर को स्नानकक्ष में लाया गया है। यह ठंडे संगमरमर पर पड़ा धुलने के इंतजार में है। आपका कफन, आपका ताबूत, सब कुछ तैयार है। दरवाज़े के बाहर आपका परिवार इंतजार में है। आपकी माँ, आपके पिता, आपके भाई-बहन, आपका जीवनसाथी और आपके बच्चे। उनकी आँखें रोने से सूजी हुई हैं और वे मुश्किल से ही बोल पा रहे हैं। जल्द ही वे आपके ताबूत को अपने कंधों पर उठाएंगे और आपको मस्जिद के आंगन में ले जाएंगे। बड़े दुख के साथ हम सूचित करते हैं कि हमारे पड़ोसी अहमद मिदयात अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके जनाज़े की नमाज़ आज नमाज़े-ज़ुहर के बाद हमारी स्थानीय मस्जिद में अदा की जाएगी। यह ऐलान उनके सभी रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के लिए है। अल्लाह उन पर रहम करे। जनाज़े की नमाज़ का जो ऐलान आप पूरी ज़िंदगी सुनते आए हैं, वह अब आपके लिए हो रहा है। जो लोग यह खबर सुनते हैं, वे चौंक जाते हैं और कहते हैं कि क्या वह गुज़र गए?

वे थोड़ी देर मौन रहते हैं लेकिन फिर अपने काम पर लौट जाते हैं। आपकी जनाज़े की नमाज़ के लिए लोग इकट्ठा होकर सफ़ों में खड़े हैं। मेरा बेटा!

और फिर आपका ताबूत फिर से उठाया जाता है, इस बार आपकी कब्र की ओर। इसे पहले से ही खोदा जा चुका है, यह खुला है, यह आपका नया घर है और यह आपके इंतज़ार में है। आपके प्रियजनों में से एक कब्र में उतरता है और सावधानीपूर्वक आपके चेहरे को क़िबला रूख करते हुए आपके जिस्म को दायीं करवट रखता है। फिर वह उससे बाहर आता है और आपकी कब्र के ऊपर लकड़ी के तख्ते रखना शुरू करता है और फिर अपने हाथों से आप पर पहली मिट्टी डालता है। रूह इन सभी लम्हों को सीधे देखती है, सब कुछ देखती है यह देखती है कि शरीर को कैसे धोया जा रहा है, जनाज़े की नमाज़ कैसे अदा की जा रही है और ताबूत को कब्र तक कैसे ले जाया जा रहा है। यह उन लोगों की आवाजें भी सुनती है जो आए, उन्होंने क्या कहा, यह सब। और जब लोग कब्रिस्तान छोड़ने लगते हैं, तो आत्मा उनके कदमों की आवाज तक सुनती है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने कहा: "मय्यत को उसकी कब्र तक तीन चीज़ें ले जाती हैं, उसका परिवार, उसकी दौलत और उसके आमाल। उसका परिवार और उसकी दौलत कब्र से लौट जाते हैं और उसके आमाल उसके साथ रहते हैं।" अगर इंसान नेक हो, तो वह चाहता है कि दफ़न की प्रक्रिया लंबे समय तक न चले। वह कब्र की ज़िंदगी की नेअमतों तक जल्द से जल्द पहुंचना चाहता है। लेकिन अगर इंसान गुनहगार हो, तो वह चाहता है कि दफ़न की प्रक्रिया लंबी चले। जो दोस्ती आपके साथ कब्र तक चलती है, अब ख़त्म हो चुकी है। अब आप अकेले हैं!

बरज़ख की दुनिया शुरू होती है। बरज़ख की दुनिया एक अलग दुनिया है, इस ज़िंदगी और आख़िरत के बीच की एक बैरियर। यह मौत से शुरू होती है और पुनर्जीवन के साथ ख़त्म। यह आख़िरत के लिए प्रतीक्षा कक्ष की तरह है। चाहे कोई इंसान समुद्र में डूब जाए और गायब हो जाए या जल कर उसकी राख तक बिखर जाए, रूह ठीक वैसी ही बनी रहती है जैसी वह थी। अल्लाह के इल्म से छुपना असंभव है। जो जिस लायक़ हो उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाएगा। इस phase को पैगंबर अलैहिस्सलाम की एक हदीस में विस्तार से समझाया गया है। "जब एक मोमिन इस दुनिया छोड़कर अगली दुनिया में जाने वाला होता है, तो जन्नत से सूरज जैसी सफेद चेहरों वाले फ़रिश्ते जन्नत के कफन में से एक कफ़न और जन्नत की कुछ खुशबू लेकर उसके पास आते हैं। और नज़र जहाँ तक देख सके उससे उतनी दूर बैठ जाते हैं।" फिर, मौत का फरिश्ता आता है और उसके सिरहाने बैठ जाता है और कहता है, “ऐ, नेक रूह!

अपने रब की माफी और प्रसन्नता की ओर आओ।’ फिर रूह आसानी से बाहर आ जाती है और वह उसे पकड़ लेता है। और जब वह ऐसा करता है, तो दूसरे फरिश्ते तुरंत उस रूह को मौत के फरिश्ते से ले लेते हैं, उसे उनके हाथों में एक पल के लिए भी नहीं छोड़ते। फिर वे इसे उस कफन और इत्र में रखते हैं। और इससे एक ख़ुशबू निकलती है जो ज़मीन पर पाए जाने वाले सबसे मीठी कस्तूरी जैसी होती है। फिर वे उसे आसमानों की ओर ले जाते है। हर समूह के फ़रिश्ते जिनके पास से वे गुजरते हैं, पूछते हैं, 'यह नेक रूह कौन है?' रूह को ले जाने वाले फ़रिश्ते उसके वो सबसे अच्छे नाम लेते हैं, जिनसे उसे इस ज़िंदगी में पुकारा जाता था। जब वे आसमान तक पहुँचते हैं, तो उनके लिए सभी दरवाज़े खोल दिए जाते हैं। हर स्तर से गुजरते हुए, जैसे ही वे सातवें आसमान तक पहुँचते हैं, फ़रिश्ते उस रूह का अभिवादन करते हैं। फिर अल्लाह फ़रमाता हैं: "मेरे बन्दे की किताब को इल्लियून यानि नेक लोगों के रजिस्टर में दर्ज करो और उसे पुनः धरती पर लौटा दो। क्योंकि मैंने इंसानों को उसी से पैदा किया है, मैं उन्हें उसी में लौटाऊँगा, और मैं उन्हें फिर उसी से निकालूँगा" फिर उसे उसकी कब्र में यानि आलमे-बरज़ख (बरज़ख के संसार) में लौटा दिया जाता है। और वहाँ, मुनकर और नकीर नामक दो फ़रिश्ते सवाल करने आते हैं। मन-रब्बुका?

- "तेरा रब कौन हैं?" "मेरा रब अल्लाह ही हैं। वही जिसकी मैंने जिंदगीभर इबादती की।" तेरा दीन क्या है? मेरा दीन - इस्लाम है! यह आदमी कौन है जिसे आपके बीच भेजा गया था?

वह अल्लाह के नबी है - मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इन सभी सवालों पर एक सच्चा मोमिन इसी तरह respond करता है और सही जवाब देता है। उसकी जिंदगीभर की इबादतें और सभी नेक आमाल उसकी कब्र में उसके साथ जुड़ जाते हैं। जब मुनकर और नकीर उससे सवाल करने आते हैं, तो नूर से बना एक जीव आता है और मय्यत के सिरहाने बैठ जाता है। यह वही इबादतें हैं जो उसने अपनी ज़िंदगी के दौरान की थी। फिर उसके अन्य नेक-आमाल एक-एक करके हाज़िर होते हैं। उसका रोज़ा उसके दाहिने खड़ा होता है, उसकी ज़कात बाईं ओर, और उसके अन्य सभी नेक काम उसके पैरों के पास इकट्ठा होते हैं। उनमें से प्रत्येक अपनी जगह पर उसे कब्र को उसकी हड्डियों को कुचलने, उसे चोट पहुँचाने या उसे किसी भी परेशानी से बचाने के लिए खड़े होते है। सवालो-जवाब के बाद, जब मोमिन सही जवाब देता है, तो उसके लिए जन्नत की एक खिड़की खोली जाती है। फिर अल्लाह हुक्म देता हैं कि उसकी कब्र को नज़र की हद तक फैला दिया जाए, और उसके लिए जन्नत के बिस्तरों में से एक बिस्तर तैयार किया जाए। फिर उसकी कब्र के किनारे एक खिड़की खुलती है और उसे जन्नत के दृश्य दिखाए जाते हैं, जो सभी मोमिनों का शाश्वत घर है। उसका दिल सुकून से भर जाता है और वह कयामत के दिन तक जन्नत को देखता रहता है। लेकिन एक और पक्ष भी है, दर्द भरा पक्ष, जो बिना ईमान के मरने वालों का इंतज़ार करता हैं और उनका जिनकी ज़िंदगी कबीरा गुनाहों से भरी होती है। "मुझे यहाँ से बाहर निकालो।" मन-रब्बुका?

"तुम्हारा रब कौन है?" "मुझे यहाँ से बाहर निकालो।" तुम्हारा दीन क्या है? यह आदमी कौन है जिसे आपके बीच भेजा गया था?

ये दिमाग़ काम नहीं कि कब्र में उत्तर दे। बल्कि यह दिल है। इंसान अल्लाह की नजर में अपने स्टेटस के अनुसार जवाब देता है। अगर वह ऐसा था जिसने अल्लाह के दीन और उसके पैगंबर का इनकार किया, तो वह उन सवालों का जवाब नहीं दे पाएगा। यहां तक कि अगर वह एक मुस्लिम था, अगर उसने गुनाहीं भरी जिंदगी गुज़ारी, तो जब वह जवाब देने की कोशिश करेगा, मुमकिन है कि उसकी जुबान काम न करे। कुछ के लिए, यह फरिश्तों के साथ एक दोस्ताना बातचीत होगी, लेकिन दूसरों के लिए यह एक दर्दनाक पूछताछ में तब्दील हो जाएगी। जहन्नुम के दरवाज़े खोल दिए जाते है और उसे अंदर की सज़ा दिखाई जाती है। और वह कब्र की सज़ा का कष्ट सहना शुरू कर देता है। उस तक जहन्नुम की तपती हुई गर्मी और बदबू पहुँचती है। उसकी कब्र तंग हो जाती है और उसे कुचलने लगती है। फिर एक आदमी काले चेहरे और गंदे कपड़ों में उस बदरूह के सामने आता है और कहता है: "यह वह दिन है जिसका तुमसे वादा किया गया था" रूह डरकर पूछती है: तुम कौन हो?

मैं तुम्हारे बुरे आमाल हूँ। वो सूद जो तुमने खाया। वो चुगली जो तुमने की। वो हराम चीज़ें जो तुमने देखी। डरते क्यों हो? क्या मैं वही नहीं हूँ जिसकी तुमने इतने सालों से चाह की?

खैर, ये रहा मैं, ठीक तुम्हारे सामने खड़ा।” इस पर वह दुआ करता है, "मेरे रब, क़यामत मत आने देना।" ज़ैद बिन षाबित ने कहा: हम अल्लाह के रसूल अलैहिस्सलाम के साथ बनू नज्जार के एक बाग़ में गए। वह अपनी सवारी पर थे, सवारी अचानक डर गई। इतनी कि वो लगभग गिर ही जाते। हमने देखा तो पाया कि वहाँ पास में कुछ क़ब्रें थी नबी अलैहिस्सलाम ने कहा - "यहाँ दफ़्न लोग क़ब्र के अज़ाब सेदोचार हैं। अगर यह ख़ौफ़ न होता कि तुम अपने मुर्दों को दफ़नाना छोड़ दोगे, तो मैं अल्लाह से दुआ करता कि जो अज़ाब-ए-क़ब्र की आवाज़ें मैं सुन रहा हूँ, वह तुम्हें भी सुना दूँ।” फिर आप ﷺ ने अपना चेहरा हमारी तरफ़ मोड़ा और फ़रमाया: “दोज़ख़ के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगो।” तो ये है - आपका नया ठिकाना। वहाँ ऊपर सब कुछ उज्ज्वल और रंगीन था, लेकिन यहाँ सब कुछ अंधेरा है। सब कुछ इतनी जल्दी खत्म हो गया, है ना?

या तो आप कहेंगे “ऐ अल्लाह कृपया मुझे एक और मौका दे दे, मैं वादा करता हूँ मैं खुद को सुधार लूँगा” जैसे कि अल्लाह ने पहले ही आपको आपकी ज़िंदगी के हर एक दिन अनगिनत मौके न दिए हों। या आप कहेंगे: या रब, सभी प्रशंसा और धन्यवाद तेरे लिए है, वो इस वजह से कि आपने अपनी ज़िंदगी ऐसे नहीं बिताई कि आख़िरत में परेशानी हो। आप हराम से दूर रहे और अपने फ़राइज़ को पूरा किया। इस दुनिया में आपकी ज़िम्मेदारी का समय पूरा हो चुका है। अब आप अपना इनाम पाने के सफ़र पर है। और ये क़ब्र आपकी पहली मंज़िल है। अगर यह वीडियो आपके पास पहुंचा है, तो आप निश्चित हो सकते हैं कि यह कोई संयोग नहीं है। अल्लाह ने इसे आपके सामने लाया और आपको इसे आख़िर तक देखने के लिए प्रेरित किया है। आपको मालूम हैं क्यों?

क्योंकि वह चाहता है कि आप अपनी ज़िंदगी में कुछ बदलें। तो क्या आप उनकी तरफ़ एक भी कदम नहीं उठाएंगे?

यह आपकी ज़िंदगी के लिए फैसला लेने का समय है। अगर आप इबादत नहीं करते तो अब से शुरू कर दें। हमारी विज्ञापन मुक्त, मुफ्त सलाह ऐप के साथ, आप रोज़ाना की पाँच नमाज़ों को अपनी ज़िंदगी का नियमित अंग बना सकते हैं। अगर आप अपने ईमान को मज़बूत करना और अपने इस्लामी ज्ञान को व्यापक करना चाहते हैं, तो हमने इस चैनल पर कई videos बनाए हैं। जिन्हें देखने का आप लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं। अगर आपको अरबी में क़ुरान पढ़ना नहीं आता तो इसके लिए हमने एक ऐप विकस्तित किया है जिसका नाम है - लाम अलिफ़ क़ुरआन। यहाँ तुरंत, आसानी एवं बिना पैसा खर्च किए क़ुरान पढ़ना सीख सकते है। और अगर आप क़ुरान के अर्थों को अधिक गहराई से जानना चाहते है तो आप हमारा kopgit ऐप डाउनलोड कर सकते है। याद रखें, एक बार जब आप अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं, चाहे वह छोटा ही क्यों न हो, सब कुछ बदलने लगेगा। तो अब आगे क्या होता है?

कब्र में लंबे समय तक इंतजार करने के बाद, आपको एक ऐसी आवाज़ से झकझोर दिया जाएगा जो आपने पहले कभी नहीं सुनी होगी। यह दुनिया की सबसे बड़ी आपदा की आवाज़ होगी क्योंकि हर किसी के लिए वह घड़ी आ गई है। इस दुनिया का अंत। अगले एपिसोड में, हम इस दुनिया का अंतिम दिन देखेंगे जिसे AI द्वारा उकेरा गया है। हमारे साथ बने रहें। क्या आपने ध्यान दिया? इस वीडियो को देखते समय, आपको कोई विज्ञापन नहीं देखना पड़ा। चूंकि Towards Eternity एक अलाभकारी संगठन है, हम ये वीडियो केवल आपके समर्थन से बना सकते हैं। यदि आप इस नेक काम का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो Towards Eternity को दान दें और ये सुनहरे अवसर न गवांए।