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कयामत का दिन - पुल सिरात | एआई-चित्रित क़यामत का दिन श्रृंखला - Ep. 3

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अब हम क़यामत के दिन के भयानक दृश्य का सामना कर रहे हैं। दुनिया के ख़त्म होने के लंबे समय बाद एक ज़ोरदार आवाज़ आती है। अल्लाह इस्राफील अलैहिस्सलाम को ज़िंदा करता है और उन्हें एक बार फिर से सूर फूँकने का हुक्म देता है। पुल-सिरात जब फैसले समाप्त हो जाता है, तो जहन्नुम के ऊपर एक पुल बनाया जाता है, जो जन्नत तक जाता है। और इसके दोनों ओर हुक लटके हुए हैं, जिनमें से प्रत्येक का काम उन लोगों को पकड़ना है जिन्हें पकड़ने का आदेश मिले। नहीं! कृपया मेरी मदद करो! नहीं!

उस परमदयालु के लिए भय से सभी आवाज़ें धीमी हो जाएंगी। इसलिए आपको कदमों की आहट के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं देगा। उस दिन हम उनके मुँह पर मुहर लगा देंगे, किन्तु उनके हाथ हमसे बातें करेंगे और उनके पैर उनके हर किए की गवाही देंगे। दुनिया अब ख़त्म हो गयी है। मौत का फ़रिश्ता समेत एक-एक करके सभी फ़रिश्ते मर चुके है। लेकिन अब, यही वह समय है जब सब कुछ सचमुच शुरू होगा। "और "सूर" फूँका जाएगा। फिर हम उन सबको एक साथ इकट्ठा करेंगे" और अब दुबारा ज़िंदा होकर सभी महशर के मैदान में जमा हो रहे है। पहले इंसान से लेकर अब तक जितने भी लोग मर चुके हैं, उन्हें एक-एक करके दुबारा ज़िंदा किया जा रहा है। दुनिया अब वैसी नहीं रही जैसे हम उसे जानते थे। यह एक बिल्कुल अलग जगह बन गई है। एक सपाट, अंतहीन मैदान जिसका कोई क्षितिज नहीं है, आपके अब तक देखे हुए से भी, कहीं अधिक बड़ा। वहां बहुत लंबा इंतजार करना पड़ेगा। हर किसी को उसके आमाल की किताब दी जाएगी और उससे हिसाब मांगा जाएगा। उसके बाद उनके सभी आमाल को तराजू यानि मीज़ान पर तौला जाएगा। फिर पुल-सिरात को स्थापित किया जाएगा, और अंत में, वो सफ़र शुरु होगा जो या तो जहन्नुम में ख़त्म होता है या फिर जन्नत में। एक के बाद एक, हम इनमें से प्रत्येक चरण को देखेंगे। कुछ लोग होंगे जो सोच रहे होंगे कि मुर्दों को दुबारा इकठा कैसे किया जाएगा?

जब वो जमीन के नीचे सड़ कर बिखर गए हैं तो उन्हें दुबारा कैसे उठाया जा सकता है? इस आयत में हमारे रब ने इस सवाल का खूबसूरत जवाब दिया है। वह कहता है, "जब हड्डियाँ सड़-गल जाएँगी तो उन्हें ज़िंदगी कौन देगा?" "कह दो वही उन्हें ज़िंदगी देगा जिसने उन्हें पहली बार ज़िंदा किया था।" और वह हर तरह की पैदाइश को जानने वाला है। वास्तव में, क्या वह creator, जिसे हम universe में उसके कामों के ज़रिए से जानते हैं, जिसके पास असीम शक्ति और सामर्थ्य है और जो सब कुछ सही क्रम में रखता है, हमें हर बसंत में 'दुबारा ज़िंदगी' (पुनर्जीवन) की मिसालें नहीं दिखाता? क्या आप नहीं देखते कि मिट्टी के नीचे छिपे बीजों को किस प्रकार जीवन मिलता है? वे उगते हैं और अनेक रंगों के फूलों में खिलते हैं? क्या आप इसके गवाह नहीं हैं?

एक ऐसे कमांडर के बारे में सोचिए जिसने एक विशाल और शक्तिशाली सेना इकट्ठा की है। फिर वह सभी को जाकर आराम करने का हुक्म देता है। क्या आपको लगता है कि यह कमांडर तुरही की एक आवाज पर अपने बिखरे हुए सैनिकों को फिर से इकट्ठा नहीं कर सकेगा? इसी तरह, अल्लाह अनगिनत चीज़ों को एक साथ लाकर इंसानों को बनाने का काम करता है। वह एक माँ को पूरी दुनिया से जमा करके खाना उपलब्ध कराता है। और उसके ज़रिए वह उसके पेट में बच्चे की creation करता है। तो क्या यह मुमकिन है कि मौत के बाद, जब हमारे अंग मिट्टी में बिखर जाएंगे, तो वह हमें दुबारा एक साथ नहीं जोड़ पाएगा?

जैसा कि आयत कहती है, "क्या हम उन्हें पहली बार पैदा करने में असमर्थ थे?" लोग भय और दहशत में अपनी कब्रों से उठ रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे वे गहरी नींद से जाग गए हों। नंगे पांव और निर्वस्त्र, वे सभी किसी एक तरफ़ तेज़ी से भाग रहे हैं। लेकिन वे जिस भय और सदमे में हैं, उसके कारण वे एक-दूसरे की ओर देख भी नहीं सकते। किसी को भी कुछ पता नहीं है कि करना क्या है। वे टिढ्ढी दल की तरह बिखरकर हर दिशा में भागने लगते हैं। दरअसल, उन्हें इस लम्हे के बारे में पहले ही बता दिया गया था। वे अपनी आँखें नम करके कब्रों से बाहर निकलेंगे, जैसे टिड्डियाँ चारों ओर फैल जाती हैं, और वे पुकारने वाले की ओर तेजी से दौड़ेंगे। काफ़िर कहेंगे...

"यह एक कठिन दिन है।" जो मोमिन जो अल्लाह की नाफ़रमानी से दूर रहते हैं। वे गर्व और प्रसन्न चेहरे के साथ चलेंगे या अपनी सवारियों पर सवार होंगे। लेकिन जो लोग कुरान से मुँह मोड़ते हैं, उन्हें मुंह के बल घसीटकर हश्र के मैदान में लाया जाएगा। कुछ चेहरे नूर से चमक रहे होंगे। जबकि अन्य पसीने से भीगे हुए होंगे। लोग अपने प्यारों को इधर-उधर ढूँढेंगे, लेकिन सब बेकार!

हर कोई अपनी परेशानियों में खोया हुआ होगा। वे एक दूसरे से दूर भागेंगे। क्योंकि उनके मन में केवल यही बात होगी, अपने गुनाहों से छुटकारा। उस दिन की सज़ा से बचने के लिए मुजरिम अपने बेटों, अपने जीवनसाथी, अपने भाई और अपने करीबी परिवार, जिन्होंने उसे पनाह दी, तथा जो कुछ भी इस ज़मीन पर है, उन सभी को एक साथ क़ुर्बान करना चाहेगा। ताकि इस तरह वो बच जाये। कृपया मुझे जाने दीजिए! अगर आप चाहें तो मेरी बीवी को ले जाइये! अगर आप चाहें तो मेरे दोस्तों को ले जाएँ! इस दुनिया में जो भी उसका दोस्त था और जिसकी भी उसने बात मानी, क़यामत के दिन वह उन्हीं लोगों की को ढूँढेगा। यदि ये दोस्ती बुराई की राह पर थीं, तो जैसे ही वह उन्हें ढूँढेगा, वह उनका गिरेबान पकड़ लेगा। जब मैं ज़मीन पर था तब मैंने तुम्हें फॉलो किया था!

मैं वो किया जो तुमने कहा। अब बताओ मैं क्या करूँ? लेकिन वे पीछे मुड़कर देखे बगैर भाग जायेंगे। वो अपने फॉलोवर्स को देखना भी नहीं चाहेंगे। और उनके फॉलोवर्स पछतायेंगे। और जो लोग उनके पीछे चले, वे कहेंगे...

"काश, हमें एक बार फिर दुनिया में लौटने का मौका मिलता, तो हम भी उनका इनकार करते जैसे उन्होंने हमारा इनकार किया है। धीरे-धीरे आपके दिमाग में भी कुछ नाम आने लगते हैं। कुछ ऐसे लोग हैं जिनका आपको उस दिन सामना करना पड़ेगा। हालांकि आप उनसे मिलना नहीं चाहते। लेकिन इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है। सारी इंसानियत एक बड़ी क़तार में एक साथ खड़ी होगी। और अब, इंतजार का समय है। लोग हैरान होंगे कि यह इंतजार कितना लंबा चलेगा, क्योंकि स्थिति असहनीय होगी। लोगों के लिए उस दिन सूरज पहले से कहीं अधिक करीब लाया जाएगा। हालांकि इस दुनिया में ये लोग 40 डिग्री सेल्सियस तापमान पर धूप में खड़े नहीं हो सकते थे, लेकिन उस दिन लोगों को बहुत लंबे समय तक चिलचिलाती धूप में इंतजार करना पड़ेगा। अपने गुनाहों के वज़न के अनुसार, हर कोई पहले से कहीं अधिक पसीने से भीग जाएगा। लेकिन क्या वहां कोई छाँव नहीं होगी?

हमारे पैगम्बर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने पहले ही उन लोगों की खुशखबरी दे दी है जो छाँव में होंगे। उन्होंने कहा, "उस दिन जब उसके सिवा कोई छाँव नहीं होगी, अल्लाह सात प्रकार के लोगों को छाँव अता करेगा: एक इंसाफ़पसंद हाकिम, एक नौजवान जो अल्लाह की इबादत के साथ बड़ा हुआ है, एक इंसान जिसका दिल मस्जिदों से जुड़ा हुआ है, दो लोग जो केवल अल्लाह के लिए एक-दूसरे से मुहब्बत करते हैं और वे केवल अल्लाह के मार्ग में मिलते और बिछड़ते हैं, एक इंसान जो एक ऊँचे ख़ानदान की खूबसूरत औरत के साथ नाजायज़ संबंध बनाने की दावत को ठुकराता है और कहता है 'मैं अल्लाह से डरता हूँ।’ एक इंसान जो इतने गुप्त रूप से दान देता है कि उसके बाएँ हाथ को पता नहीं चलता कि उसके दाहिने हाथ ने क्या दिया है। और एक इंसान जो एकांत में अल्लाह को याद करता है और उसकी आँखें आँसुओं से भर जाती हैं।" एक हदीस से एक और खुशखबरी कुछ यूँ है - "जो कोई भी कर्ज में डूबे इंसान को, जो मुश्किल में है, मोहलत दे, या कर्ज का पूरा या कुछ हिस्सा माफ कर दे, क़यामत के दिन जब उसकी छाँव के अलावा कोई छाँव नहीं होगी, अल्लाह उसे अपने सिंहासन की छाँव में पनाह देगा, इंतज़ार बहुत लम्बे समय तक जारी रहेगा। फिर भी, हिसाब शुरू नहीं होगा। यहाँ तक कि एक वक्त आएगा जब लोग इस हालत से छुटकारा दिलाने के लिए किसी की बेताबी से तलाश करेंगे। सबसे पहले वो पूरी मानव जाति के पिता पैगंबर आदम अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे। फिर नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा अलैहिस्सलाम के पास जाएँगे। भले ही वे सभी महानतम पैगम्बरों में से हों, फिर भी सभी कहेंगे "नफ़सी, नफ़सी यानि मैं, मैं। दिन इतना कठिन होगा कि पैगंबर भी सिर्फ़ अपने आप को बचाने में व्यस्त होंगे। सुबहानअल्लाह उनमें से कोई भी अपने आप को अल्लाह से यह मांगने के योग्य नहीं समझेगा। हर कोई एक-दूसरे की ओर इशारा करेगा, यहाँ तक कि आखिरकार हमें अपने पैगम्बर मुहम्मद अलैहिस्सलाम की तरफ़ भेजा जाएगा। और आख़िर में उनकी अल्लाह से की गई दुआ के बाद हिसाबो-किताब शुरू हो जाएगा। लेकिन उसके बाद जो कुछ होगा वह पहले की अपेक्षा और भी अधिक कठोर होगा। महान हिसाब से पहले, हर कोई एक क़तार में खड़ा होगा। तभी बाईं ओर से एक भयानक गर्जना सुनाई देगी, जिससे डरकर सब काँप उठेंगे। 'जहन्नुम!' जहन्नुम की आग अपने पूरे क्रोध और शक्ति के साथ प्रकट होगी, ये बेसब्री से जलेगी क्योंकि उसके सामने वे लोग हैं जिन्होंने अत्याचार और भयानक पाप के अनगिनत कार्य किए हैं, जिन्होंने अल्लाह और उसके पैगम्बरों का इनकार किया है, जिन्होंने ईमान वालों का मज़ाक़ उड़ाया है, और जिन्होंने सैकड़ों निर्दोष लोगों को मार डाला है। डर से जमे वे लोग बस बेबस होकर देख ही सकेंगे। और दाहिनी ओर जन्नत अपनी सम्पूर्ण सुन्दरता और भव्यता के साथ प्रकट होने लगती है। इस दुनिया में जिन लोगों ने अल्लाह पर ईमान लाया और उसके पैगम्बरों की बात सुनी, वे खुशी से इंतज़ार कर रहे हैं। अपने ख़ुद के हिसाब के रस्स्ते में आप एक चौंकाने वाले दृश्य से रूबरू होते हैं। इस दुनिया में रहते हुए एक बार एक भेड़ ने एक गर्भवती भेड़ को अपने सिर से मारा था, जिससे उसका बच्चा मर गया था। उस दिन इन दोनों भेड़ों को आमने-सामने लाया जाएगा ताकि बदला अर्थात क़िसास लिया जाये और दूसरे के साथ भी ऐसा ही किया जाए। उस लम्हे, आपको सचमुच एहसास होगा कि जिन छोटी-छोटी चीजों को आप महत्वहीन समझते थे, उनका भी हिसाब होगा। "तो जिस शख्स ने ज़र्रा बराबर नेकी की वह उसे देख लेगा" "और जिस शख्स ने ज़र्रा बराबर बदी (बुराई) की है तो उसे देख लेगा" अब, हर किसी को उसका नामाए आमाल (आमाल की किताब) दिया जाएगा। जन्नत के लोग इसे दाहिनी तरफ़ से हासिल करेंगे। जबकि जहन्नम के लोग इसे बाईं ओर से या पीछे से हासिल करेंगे। जिनका नामाए आमाल दायें तरफ़ से दिया जाएगा उन्हें असहाब अल-यमीन कहा जाता है। दायें तरफ़ वाले!

और जिनका नामाए आमाल बाईं ओर या पीछे से दिया जाएगा उन्हें असहाब अल-शिमाल कहा जाता है। बाएं तरफ़ वाले! और जब आमालनामा उनके सामने रखा जाएगा तो अपराधियों को देखोंगे कि वे उसमे लिखे से डर रहे है। और वे कहेंगे, "हाय, हमारा दुर्भाग्य!

यह कैसी किताब है, इसने तो किसी भी छोटे बड़े आमाल को दर्ज करना नहीं छोड़ा।" वे पाएंगे कि जो कुछ उन्होंने कभी किया था, वो सब उनके सामने रखा हुआ है। तुम्हारा रब किसी पर भी अन्याय नहीं करेगा। काश मैंने कभी उस शैतान का अनुसरण न किया होता। प्लीज़, मैं मुआफ़ी चाहता हूँ। मुझे एक और मौका दे दें। काश मैंने अपने नफ़्स की बात न मानी होती। काश मैं धूल में मिल जाता। जहाँ तक जन्नत के लोगों का सवाल है, जब उन्हें उनका नामाए आमाल मिलेगा तो क़ुरआन उनका वर्णन इस प्रकार करता है। "जिस किसी को भी उसकी किताब उसके दाहिने हाथ में दी जाएगी, वह कहेगा...

'यह लो मेरी किताब, इसे पढ़ो। मैं जानता था कि मुझे मेरा हिसाब (किताब) ज़रूर मिलेगा। और इस तरह वह एक सुखद जीवन में होगा। इतने ख़ौफ़नाक दिन के होते हुए क्या हमें इस ख़ुशी और आराम को हासिल करने के लिए हराम कामों से दूर नहीं रहना चाहिए? सभी दहशतों के बावजूद, उस दिन किसी शख्स से जो सवाल किया जाएगा वह बिल्कुल सीधा सा है वो ज़िंदगी जो गुज़ार कर आए हो, जो आख़िरत के मुक़ाबले में कुछ भी नहीं है, वो हराम कामों से दूर रहकर गुज़ारी या नहीं?

आखिरकार, जो कोई भी अपनी ज़िंदगी हराम में गुज़ारता है, वह कभी भी वास्तविक आनंद का स्वाद नहीं चख सकता। अल्लाह तआला काफ़िरों से पूछेगा, "तुम ज़मीन पर कितने साल रहे?" वे कहेंगे, "हम एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा रहे हैं। गिनने वालों से पूछ लीजिए। वह कहेगा, "तुम ठहरे थोड़े ही, क्या अच्छा होता तुम जानते होते! ये वे लोग हैं जिन्होंने आख़िरत के बदले में दुनिया की ज़िंदगी ख़रीद ली है। इसीलिए न तो उनपर से अज़ाब हल्का किया जाएगा और न ही उन्हें कोई मदद दी जाएगी। और अब, जिन लोगों ने ईमान लाने से इनकार किया, यानि काफ़िर!

उन्हें उनके हमेशा के ठिकाने, जहन्नुम की आग में फेंक दिया जाएगा, जहां से फिर कभी नहीं निकाले जाएँगे। अपने कुफ़्र और उस ज़ुल्म के मुताबिक़ जो वो करते थे उनकी सज़ा और भी कठोर होगी। लेकिन शायद सबसे बुरी बात यह है कि वे अपने उस रब को कभी नहीं देख पाएंगे जिसने उन्हें बनाया है। अब केवल एक मरहला (step) बाक़ी है: पुल सिरात!

जो जहन्नुम के ऊपर बना है और जन्नत की ओर जाता है। मुत्तक़ी मोमिन, गुनहगार, काफ़िर सभी इस पुल पर आएंगे। जन्नत तक पहुँचने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। पुल सिरात को पार करने वाले पहले लोग पैगंबर मुहम्मद अलैहिस्सलाम और उनकी उम्मत होगी। हर कोई अपने आमाल के मुताबिक़ इस पुल को पार करेगा। कुछ बिजली की तरह गुजरेंगे, कुछ हवा की तरह। कुछ लोग तो चल भी नहीं सकेंगे और रेंगकर पार करने की कोशिश करेंगे। सिरात के दोनों ओर हुक लटके हुए होंगे। इन्हें कुछ खास लोगों को पकड़ने का हुक्म दिया जाएगा। नहीं! कृपया मेरी मदद करो! नहीं!

कुछ लोग इन कुंडों से खरोंच पाकर और घायल होकर बच निकलेंगे, जबकि अन्य को पकड़ लिया जाएगा और जहन्नुम की आग में फेंक दिया जाएगा। जहन्नम कभी संतुष्ट नहीं होता। जब पूछा जाता है, "क्या तुम्हारा पेट भर गया है?" वह चिल्लाता है, "हल मिम मजीद - क्या कुछ और हैं?" अपनी पूरी भयावहता के साथ, जहन्नुम हमारे पैरों के ठीक नीचे होगा। हमारी आंखों के सामने धधक रहा होगा। हम कोशिश करेंगे हैं कि इसे न देखें और बस पुल पार करते रहें। फिर हम अपने आस-पास के लोगों को देखेंगे। उनमें से कुछ लोग अपने गुनाहों पर पछता रहे होंगे। जबकि कुछ लोग जहन्नुम की आग में गिर रहे होंगे। और फिर ऐसे लोग भी होंगे जो इस दुनिया में अपनी आख़िरत को लेकर खबरदार रहे। वे बिना किसी दर्द के, बहुत तेज़ी से पुल पार कर लेंगे। नेक लोगों को जहन्नुम दिखाने का मक़सद उन्हें डराना नहीं है बल्कि उनकी खुशी को और भी अधिक बढ़ाना है। उन्हें दिखाया जाएगा कि उन्हें किस भयानक जगह से बचाया गया है। वे एक लम्हे में गुज़र जाएँगे। आखिरकार उनकी तड़प ख़त्म हो जाएगी। और वे अपने हमेशा हमेश वाले घर, जन्नत में पहुंच जाएँगे। जब यह सब हो रहा है, तो कोई व्यक्ति दुःख और करुणा के साथ दुआ कर रहा होगा। उन्होंने जिंदगीभर अपनी उम्मत को रहमतभरी नज़रों से देखा और उनके लिए दुआएँ की। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम "ऐ मेरे रब सलामती अता कर।" वह मोमिनों के लिए दुआ कर रहे होंगे। उस दिन हमारी कठिनाई हमारा हिसाब होगा। लेकिन उनकी कठिनाई अपनी उम्मत को उस हाल में देखना होगा। उनको देखना जिन्हें उनका नामाए आमाल बाएं हाथ में मिला होगा। पुल सिरात पर उनकी हालत और उनका एक-एक करके जहन्नम में गिरना देखना। दूसरी ओर, उनको तसल्ली होगी उन लोगों को देखकर जो जन्नत के दरवाज़ों तक पहुंचने में कामयाब रहे। आखिरकार जहन्नम ने उन लोगों को ले लिया जो इसके हकदार थे। और अब जन्नत के लिए अपने लोगों का स्वागत करने का समय आ गया है। "और जो लोग अपने रब से डरते थे, उन्हें जन्नत की ओर समूहों में ले जाया जाएगा। जब वे पास पहुंचेंगे, तो उसके दरवाज़े खुले हुए पाएंगे, और उसके रक्षक उनसे कहेंगे, "आप पर सलामती हो। आप सब पाक हो चुके इसलिए जन्नत में प्रवेश कीजिए और हमेशा के लिए यहीं रहिए।" इंशाअल्लाह अगर हम सफल होते हैं, तो इस सफ़र के बाद हम जिस जगह पहुंचेंगे वह इतनी खूबसूरत है कि, हमारे रब के शब्दों में कहें तो, जन्नत वह है जिसे कभी किसी आंख ने नहीं देखा, न किसी कान ने कभी सुना और न किसी इंसान ने कभी उसकी कल्पना की। और अब, हम अनन्त सुख के प्रदेश में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ हम हमेशा रहेंगे और हर प्रकार के सुख का आनन्द लेंगे। और सबसे बढ़कर, हमें एक सबसे बड़ी नेअमत मिलेगी : अल्लाह का दर्शन। यदि यह वीडियो आपके पास पहुँचा है, तो आप निश्चिंत हो सकते हैं कि यह कोई संयोग नहीं है। अल्लाह ने इसे आपके सामने लाया है और आपको इसे अंत तक देखने के लिए प्रेरित किया है। क्या आप जानते है क्यों?

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