हम एक brand new series शुरू कर रहे हैं जो artificial intelligence से बनाई गई है। क़यामत का दिन। क़ब्र की ज़िंदगी! मुझे यहाँ से बाहर निकालो! मन-रब्बुका? तुम्हारा रब कौन है? मुझे यहाँ से बाहर निकालो! दु…
और अब तुरही बज चुकी है। समय आ गया है और अंत शुरू हो गया है। यह दुनिया और पूरी कायनात की मौत का समय है। ज़मीन और आसमान अब पहले जैसे नहीं रहे। हर चीज़ एक एक कर के फ़ना हो रही है। भ्रम में लोग एक-दूसरे क…
अब हम क़यामत के दिन के भयानक दृश्य का सामना कर रहे हैं। दुनिया के ख़त्म होने के लंबे समय बाद एक ज़ोरदार आवाज़ आती है। अल्लाह इस्राफील अलैहिस्सलाम को ज़िंदा करता है और उन्हें एक बार फिर से सूर फूँकने क…
अब फैसला ख़त्म हो गया है। दिव्य न्यायालय की कारवाईयाँ पूरी हो चुकी और सभी का अंतिम ठिकाना तय हो चुका है। अरबों लोग अब दो समूहों में बंट गए हैं। कुछ जन्नत के लिए तो कुछ जहन्नुम के लिए। जन्नत के दरवाज़े…
भाइयों और बहनों,आप सभी का स्वागत है। आज की डिबेट में दो आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस प्रतिद्वंद्वी, एक मुसलमान और एक ईसाई आमने सामने होंगे। वे ऐसे तर्क प्रस्तुत करेंगे जो शताब्दियों की धर्मशास्त्र, धार्मिक…
मेरे पास पैसे थे। मेरे पास गाड़ियाँ थीं। मेरे पास बाइक थी। मैंने एक साल में 1.23 मिलियन डॉलर कमाए थे। मेरे पास सप्लायर था। हम 20 मिलियन डॉलर की ड्रग डील करने वाले थे। जब हमने ड्राइव करना शुरू किया वो…
हो सकता है, किसी ने यह वीडियो यूट्यूब पर अपलोड ही न किया हो। हम कभी नहीं जान सकते। यह बात बेमतलब लगती है, है न? यह तथ्य कि आप यह वीडियो देख रहे हैं, यह सिद्ध करता है कि ज़रूर ही किसी ने इसे अपलोड किया…
हम रोज़ाना क़रीब 40 बार सूरह अल-फातिहा पढ़ते हैं, लेकिन अगर मैं पूछूँ, "क्या आपको सूरह अल-फातिहा का मतलब पता है?" तो हममें से ज़्यादातर शायद नज़रें चुराने लगेंगे, है ना? या अगर हम इस बारे में सड़क पर…
क्या हो अगर कुछ चीज़ों के हमारे मुताबिक़ नहीं होने की कोई वजह हो? क्या पता हमसे कोई चूक हो रही हो। हमारी ज़िंदगी में कुछ बाधाएँ हैं। हम आगे बढ़ना चाहते हैं, हम ज़िंदगी का आनंद लेना चाहते हैं, लेकिन फि…
हम अपनी रोज़ाना की इबादतों के दौरान कई बार सुबहान अल्लाह कहते है। क़याम के दौरान, रुकू में, सजदों में, नमाज़ के बाद तस्बीह पढ़ने के दौरान। हम इसे बार-बार दोहराते रहते हैं। लेकिन इस शब्द का असल मतलब क्…
मैं पश्चिमी कनाडा के पहाड़ों में पला-बढ़ा हूँ। हमारे घर में दीन-धर्म की कोई जगह नहीं थी। ईश्वर सिर्फ़ उन कमज़ोर लोगों के लिए था, जिन्हें ज़िंदगी जीने के लिए किसी सहारे की ज़रूरत हो। आपको पता है, मेरे…
एक ऐसी किताब की कल्पना करें, इतनी स्पष्ट कि एक साधारण व्यक्ति भी समझ ले, पर इतनी गहरी कि विद्वान भी उसे समझने में अपनी उम्र बिता दें। एक ऐसी किताब जिसकी आयतें कभी पुरानी नहीं होती, और आज तक कोई भी इसक…