इटैलियन माफ़िया बॉस ने क़ुबूला इस्लाम : “मुझे छह गोलियाँ मारी गईं!”
प्रकाशन तिथि
मेरे पास पैसे थे। मेरे पास गाड़ियाँ थीं। मेरे पास बाइक थी। मैंने एक साल में 1.23 मिलियन डॉलर कमाए थे। मेरे पास सप्लायर था। हम 20 मिलियन डॉलर की ड्रग डील करने वाले थे। जब हमने ड्राइव करना शुरू किया वो थोड़ा संदिग्ध लगा, लेकिन मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया। मेरा बेटा कार से उतरा, उसे अलविदा कहा, और जैसे ही उसने अलविदा कहा, उसने बंदूक उसके सीने पर रख दी। बूम, उसने मेरे बेटे को गोली मारी, उसे कार में खींच लिया, वो बोला, "बाबा" और फिर मैंने देखा तो उसने बंदूक मेरी तरफ तान दी, मैं ऐसे हुआ और मैंने पैर पैडल पर रख दिया। बूम, बूम, बूम, बूम। उसने मुझे गोली मारी। अस्पताल वाली जेल से, वे मुझे मेनस्ट्रीम जेल एक हाई-सिक्योरिटी, याटाला जेल ले गए। उन्होंने मुझे जेल के अंदर ही सज़ा वाली जगह में डाल दिया। वहाँ मैं क़ुरआन पढ़ रहा था और मैं सूरह अल-इमरान पढ़ रहा था। "अल्लाह के हुक्म से, हर जान को मौत का स्वाद चखना है, और सब कुछ लिखा हुआ है।" जब मैं उस हिस्से पर पहुँचा जहाँ लिखा था "सब कुछ लिखा हुआ है," तो मेरे कंधों का बोझ कुछ ही सेकंड में उतर गया। मैं बहुत खुश था। अस्सलामु अलैकुम ब्रदर विंस फोकारेली। हमारा निमंत्रण स्वीकार करने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। हमें बहुत खुशी है कि आप हमारे साथ हैं। मैं शुरुआत में पूछना चाहता हूँ, विंस फोकारेली कौन हैं?
क्या आप हमें अपनी ज़िंदगी के बारे में बता सकते हैं?
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह। मैं बहुत विनम्र महसूस करता हूँ, और आपके पॉडकास्ट में बुलाने के लिए शुक्रिया। मेरा जन्म इटली में सलेर्नो नामक शहर में हुआ था। तो जब मैं छह साल का था, मैंने अपनी ज़िंदगी की पहली हिजरत इटली से ऑस्ट्रेलिया, साउथ ऑस्ट्रेलिया, एडेलेड की तरफ की। मैं 14 साल की उम्र से ही गैंगस्टर था। मैंने सबसे बेहतरीन लोगों के साथ उठना-बैठना किया। जब मैं सबसे बेहतरीन कहता हूँ , इसका मतलब नाइटक्लब के बॉस और बाकी सब से है। मैं गैंग की दुनिया में शामिल रहा हूँ और इतनी गहराई तक चला गया कि मैं एक पूरे स्टेट का बॉस बन गया, ऑस्ट्रेलिया के सबसे बदनाम क्रिमिनल बाइकर ग्रुप का। मैं बहुत-बहुत सालों तक एक क्रिमिनल रहा हूँ, इस हद तक कि मेरे सौतेले बेटे ने मेरी बाँहों में ही दम तोड़ दिया। तो उसके बाद, मैंने इस्लाम अपना लिया। तो इस्लाम से पहले आपकी ज़िंदगी आस्था के मामले में कैसी थी?
आप किस पर विश्वास करते थे?
मैं रोमन कैथोलिक था। मैं हमेशा ईश्वर पर विश्वास करता था। जेल में भी मैं प्रार्थना करता था। मैं क्रॉस बनाता था और प्रार्थना करता था। हम क्रॉस पहनते थे। माफिया भी बहुत धार्मिक होते हैं, विश्वास करें या ना करें। आप जानते हैं, वे अपने गुनाह स्वीकार करने के लिए पादरी के पास भी जाते हैं। कुछ को गिल्ट होता है। लेकिन हमारे पास दोनों दुनिया थीं। आप जातेऔर अपने गुनाह स्वीकार करते। वे आपको हेल मैरी पढ़ने को कहते और ऐसी बातें करते। और जैसे ही आप चर्च से बाहर निकलते, आप वापस अपने पेजर पर होते। "मैं तुमसे यहाँ मिलूँगा।" "वहाँ ड्रग्स बेच रहा हूँ।" तो हमारे लिए, क्रिस्चियन, यानी रोमन कैथोलिक आस्था में, ये संस्कृति और परंपरा थी। ऐसे ही होना, ये हमारे डीएनए का हिस्सा था, आप समझ रहे हैं ना?
और लोग इसे समझते नहीं हैं। हमें ये यक़ीन दिलाया गया था कि अगर हम पादरी के पास जाएँ, वो दरवाज़ा खोलते हैं, छोटी सी खिड़की खुलती है, और आप कहते हो, "फ़ादर, मैंने गुनाह किया है। मैंने एक आदमी को गोली मारी। मैंने उसे नहीं मारा। मैंने ड्रग्स बेचे हैं। "मैं बदलना चाहता हूँ, लेकिन जानते हो, मैंने ये किया, वो किया है।" "मेरे बेटे, आने के लिए शुक्रिया। यीशु तुमसे प्यार करते हैं। 15 हेल मैरी पढ़ लो। ये कर लो।" और कभी-कभी आप बॉक्स में चैरिटी डाल देते हो और बस हो गया। बहुत आसान। और आप सोचते थे कि आपको माफ कर दिया गया? हाँ। हमें इसी पर यक़ीन दिलाया गया था। इस्लाम से पहले आपकी ज़िंदगी कैसी थी? आप जिस माहौल में थे, आपकी आदतें, आपकी पसंद, आपके दिन कैसे थे?
एक इटालियन होने के नाते, आप बड़े होते हैं ये जानते हुए कि माफिया दुनिया चलाता है। अब, एक इटालियन होने के नाते, मैं देशभक्त हूँ। तो हम अपनी उँगलियों में रिंग पहनते थे। जानते हैं, हम माफिया का हिस्सा होते थे। इटालियन माफिया का हिस्सा होते हैं। हमारे पास माफिया फैमिली मेंबर और गैंगस्टर्स होते हैं। हम ड्रग व्यापार चलाते थे। हम राजनीति चलाते थे। 14 साल की उम्र में सड़क पर ड्रग्स बेचते हुए, मैं नाइटक्लब में जाता था जहाँ मालिक या एडल्ट इंडस्ट्रीज़, स्ट्रिप जॉइंट्स, ऐसी चीज़ें होती थीं। इसलिए मैं नाइटक्लब में इंतज़ार नहीं करता था। बाउंसर मेरी रक्षा करते थे। अगर पुलिस उस जगह में आ जाती, तो उनका लाइसेंस रद्द हो जाता। मैं सिर्फ 14, 15, 16, 17 साल का था। आपकी उम्र 18 या उससे ज़्यादा होनी चाहिए थी। लेकिन मुझे उस सड़क के सभी नाइटक्लबों से सम्मान मिलने का सौभाग्य मिला था। आपको पता है, मैं दुश्मन पर गोली चलाने के लिए हथियार लेकर चलता था। हर बार जब मुझे गोली लगी है, वो बहुत नजदीक से लगी है। दूर से नहीं। हाँ, हमेशा बेहद नजदीक से ही लगी है। तो, मेरे सिर में यहाँ एक गोली फँसी हुई थी। तो वो उन्होंने काटकर निकाल दी। तो मुझे यहाँ गोली लगी थी। मुझे यहाँ भी गोली लगी थी। और ये यहाँ से होकर बाहर निकली। मुझे यहाँ से गोली लगी, दो पसलियाँ टूट गईं। वो मेरे दिल में जाना चाहिए था, लेकिन वो मेरी छाती से बाहर निकल गई। एक गोली ने मेरी त्वचा को फाड़ दिया, लगभग मेरी रीढ़ की नसों के पास तक। मैं ज़िंदगी भर के लिए paralyze हो जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब मैं झुका, तब वो निकल गई। दूसरी यहाँ है। मुझे पैर में भी गोली लगी थी और मुझ पर गोली चलाई गई थी। और एक बार बम से हमला करने की भी कोशिश की गई। तो उन्होंने एक बम लगाया था वे मेरे घर के आसपास बम लगाने की कोशिश कर रहे थे। जब उन्होंने बम निकाला और मैं कार से करीब 20 मीटर दूर था रात में, सुबह करीब 5 या 5:30 बजे, उन्होंने कार से बम बाहर निकाला। जैसे ही उसने बम को छुआ — धमाका हो गया। तो, मेरे पास पैसे थे। मेरे पास कारें थीं। मेरे पास बाइक थीं। मेरा अपना बिज़नेस था। मेरे पास ड्रग्स थे, नाइटक्लब में इज़्ज़त थी, लड़कियाँ थीं और बाकी सब भी था। जितना भी चमक-धमक आप सोच सकते हैं, सब था। मैं अब उस लेवल पर पहुँच चुका था, ये अच्छा लगता था। ग़लत मत समझिए। वो एहसास अच्छा था, ताकतवर महसूस होता था और बाकी सब भी। लेकिन अजीब बात ये थी कि जब मैं घर लौट रहा होता था और अकेले कार चलाते हुए घर जा रहा होता था, मुझे हमेशा अंदर से खालीपन महसूस होता था। यानी वह समय जब आप घर लौटते हैं, या सोने जाते हैं या सुबह उठते हैं— आपकी बीवी और बच्चे थे, लेकिन आपको अंदर एक खालीपन महसूस होता था। और ये हमेशा मेरे अंदर था। मैंने उस समय एक साल में 1.23 मिलियन डॉलर कमाए थे। ये बहुत सारे पैसे हैं। और मैं उसे ख़र्च भी कर देता था। वर्साचे के कपड़े, लिमोज़िन, गाड़ियाँ, ये, वो सब। लेकिन उसके बाद बस स्पष्ट ख़ालीपन का एहसास होता था। आपने पहली बार इस्लाम के बारे में कैसे सुना और आपका इस्लाम की तरफ़ सफ़र कैसे शुरू हुआ?
जब मेरा हेल्स एंजेल्स के साथ झगड़ा हुआ, तो मैं पर्थ के एक इराकी शख़्स के साथ जुड़ गया। मेरा ख्याल है कि उन्हें स्कॉर्पियन किंग्स या कुछ ऐसा कहते थे। मुझे ठीक से नहीं पता, लेकिन उन्होंने मेरे बारे में सुना था और वे एडिलेड आकर मेरे साथ बिज़नेस करना और हाथ मिलाना चाहते थे। अब, मुझे पता है ये पागलपन लगेगा और ऐसा लगेगा जैसे मैं किसी गुफा में रहता रहा हूँ, लेकिन मुझे इस्लाम या मुसलमानों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मुझे सच में नहीं पता था। तो ये अरब लोग आए, लंबी कहानी को छोटा करूँ तो, जब वे आए और मेरे साथ मिले, तो हमारे दुश्मन एक ही थे। हम एक नाइटक्लब गए, जो पूरी तरह भरा हुआ था। और कुछ चीजें होती थीं, गोलीबारी, फायरिंग, लड़ाई-झगड़ा, और फिर हम उनके घर वापस जाते थे, और वे लंबा सा कपड़ा पहनते थे, वे वज़ू करते थे, मुझे तब नहीं पता था, वे खुद को धो रहे थे, और वे नमाज़ पढ़ना शुरू कर देते थे। मैं सोच रहा था, क्या हो रहा है?
उसने कहा, "वे नमाज पढ़ रहे हैं।" "नमाज़ क्या होती है?" "वे मुसलमान हैं।" ओह, अच्छा। मुझे कभी पता नहीं था कि वे मुसलमान हैं। मैंने कहा, वो क्या होता है?
वह बोला, तुम जानते हो, ये वो। और पहली रात, मैं लाउंज एरिया में था, और वे अली, हमज़ा, और नबी ﷺ बारे में बात करने लगे। और अब मैं सच में बहुत उत्सुक था। वे योद्धाओं के बारे में बात कर रहे थे, अली, जो एक योद्धा थे, इस्लाम, वे ईश्वर से कितना प्यार करते थे, वे ईश्वर के प्रति कितने वफ़ादार थे। उनका ईमान ही सब कुछ था। मैं सोच रहा हूँ, वाह, और ये लोग योद्धा हैं। और फिर उन्होंने पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बारे में बात की। क्या कहानी थी। हम तो बस इतना जानते थे कि हमारे लिए यीशु मसीह ही आख़िरी थे, पैग़ंबर, मसीहा, ईश्वर। यह बाइबिल में है, आप जानते हैं ना?
और फिर उन्होंने यीशु मसीह के बारे में बात करना शुरू किया। मैंने उनसे कहा, मैं खड़ा हो गया। मैंने कहा, आप यीशु मसीह के बारे में क्या जानते हैं? वह मेरे प्रभु हैं। वह मेरे, आप जानते हैं, मसीहा हैं।” मुझे बोलना चाहिए। मेरा मतलब, मैं बाइबल के बारे में जानता हूँ। “नहीं, नहीं, नहीं, विंस, नहीं। हम उनसे प्यार करते हैं।” "हूँ?" हम उनको बहुत चाहते हैं, हम उनसे बहुत प्यार करते है। हम उनका सम्मान करते है। हम उनका पालन करते है। मदर मैरी...
वर्जिन मैरी, बाइबल की कहानी...” वे इसके बारे में क़ुरान में बात करने लगे। और जिसने मुझे चकित किया, वह यह था कि क़ुरआन में मदर मैरी का एक पूरा अध्याय है, बाइबल में मदर मैरी का सिर्फ़ चार-पाँच बार ज़िक्र है, अगर मैं ग़लत नहीं हूँ तो। बस जिक्र हुआ है। लेकिन यहाँ तो मदर मैरी का पूरा एक चैप्टर है, मतलब, ईमान वालों की माँ, सही?
और फिर यीशु मसीह की कहानी और जितना वो बोलते गए, मैं मज़ाक नहीं कर रहा, यह ऐसा था जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा फ़िल्म या शो देख रहा हो। जैसे मैं उत्सुक था। उसी पल, मेरे दिल में ये एहसास हुआ कि चाहे वहाँ नशा था या नहीं, अल्लाह ने मुझे हिदायत दी थी। और मैं बहुत उत्सुक था। अब, रोमन कैथोलिकों की दिक्कत ये है, है ना, कि हम एक परंपरा और संस्कृति को फ़ॉलो करते हैं। जब आप बाइबल पढ़ते हैं, मैंने बाइबल पढ़ी है। मैं ये नहीं कह रहा कि मैं बाइबल का मास्टर हूँ। लेकिन मुझे बाइबल की कुछ बातें पता हैं। जैसे कि, यीशु मसीह ने अपनी क़ौम से कहा, "ऐ मेरी कौम, मेरी इबादत मत करो। मैं तुम्हारा ईश्वर नहीं हूँ।" बिल्कुल साफ़। बहुत सीधी बात है, है ना?
ठीक है। लेकिन हम उनकी पूजा करते हैं। हम बाइबल पढ़ते हैं, लेकिन बस पढ़ते ही हैं। हम सोचते नहीं थे। वो बस ईमान, संस्कृति और परंपरा की वजह से था। यीशु मसीह ने कहा, “सूअर का मांस मत खाओ।” कैथोलिक लोग सूअर का मांस खाते हैं। हम सूअर का मांस नहीं खाते। यीशु मसीह ने कहा, “शराब से दूर रहो।” ये हर बड़े गुनाह के दरवाज़े खोल देती है। यीशु मसीह ने बाइबल में कहा है “किसी भी तरह की मूर्ति की पूजा मत करो, उसके आगे मत झुको, किसी भी मूर्ति, प्रतिमा या किसी भी प्राणी से प्रार्थना मत करो, चाहे वो आसमान का, ज़मीन का , या पानी के नीचे का देवता हो। हमारे पिता, ईश्वर से सीधे प्रार्थना करो, क्योंकि ईश्वर ईर्ष्यालु हैं।” हम क्रॉस से, मदर मैरी से, बेबी जीसस से प्रार्थना करते हैं। लेकिन हम यही करते हैं। खैर, लंबी बात छोड़ें, वे यीशु मसीह की बात कर रहे थे। वे बाइबल की बात कर रहे थे। तो अब सब कुछ समझ आने लगा। फिर दूसरी रात, तीसरी रात, पैग़ंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की दिल छू लेने वाली कहानियाँ, सही?
और अली, जिन्हें वे ‘अली द मैग्निफिसेंट’ कहते थे। और वो सच में कमाल के थे। माशाअल्लाह! अल्लाह उनसे राज़ी हों! और मैं इस कहानी में इतना डूब गया था, बेहद ज़्यादा दिलचस्पी हो गई थी। और फिर बाइबल में विरोधाभास दिखने लगा। मेरा मतलब, हमें सिखाया जाता है कि शैतान, शैतान, इब्लिस, यीशु मसीह को पकड़कर 40 दिन और 40 रातों तक रेगिस्तान में लेकर चला गया, और फिर उसने, उसने यीशु मसीह से कहा यही मेरा मतलब है बाइबल पढ़ने से, ठीक है? उसने कहा, “अपने ईश्वर के प्रति अपना ईमान छोड़ दो।” ये उसने यीशु से कहा, है ना? “अपने ईश्वर के प्रति अपना ईमान छोड़ दो और अपनी वफ़ादारी मुझे दे दो।” क्या इससे वो खुदा या खुदा का पैग़ंबर बन जाता है आप समझ रहे हैं मैं क्या कहना चाहता हूँ?
बाइबल में इतनी सारी बातें हैं जो बताती हैं कि यीशु खुदा नहीं थे। यहाँ तक कि यीशु ने कहा, “मेरे पिता की इबादत करो, तुम्हारे पिता, मेरे खुदा और तुम्हारे खुदा की।” तो ये सारी बातें सामने आने लगीं। और मैं परेशान होने लगा। कैसे उन्होंने हमसे झूठ बोला?
तीसरी सुबह, मैं बाहर निकल रहा था। उसने दरवाज़ा खोला, मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया। मैंने कहा, “बस हो गया।” मैंने कहा, “मैं मुसलमान कैसे बनूँ?” मैंने कहा, “खुदा एक ही है, अल्लाह। और यीशु मसीह एक संदेशवाहक थे, पैग़ंबर, जो मरियम(अलैहिस्सलाम) से पैदा हुए थे।” ये दोनों मुसलमान अब बहुत खुश हो गए। "मेरे बाद दोहराओ, विंस।" "तैयार हो?" मैंने कहा, "हाँ, मैं तैयार हूँ।" “अशहदु अन ला इलाहा इल्लल्लाह व अशहदु अन्ना मुहम्मद रसूलुल्लाह।” मैंने कहा, "मैं इसे दोहराता हूँ, ठीक है?" “मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई ईश्वर नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (स॰अ॰व॰) उसके रसूल हैं।” देखिये, कितना लंबा है, है ना?
लेकिन मैंने पहली बार में बिना गलती के बोल दिया। सच में। जैसे नदी की तरह बह रहा था। मैंने उसे नहीं कहा, मैंने उसे नहीं कहा, रुको ये करो वो करो। उसने इसे रुक रुक कर के नहीं कराया। उसने कहा, “अशहदु अन ला इलाहा इल्लल्लाह... सब चलता रहा। वो बोला “नहीं भाई, तुमने कह दिया।” मुझे गले लगाया, “मैं तुमसे प्यार करता हूँ।” “तकबीर!” “अल्लाहु अकबर!” मैंने कहा, “सच में?
क्या मैं मुसलमान हूँ?” मैंने कहा। “अल्लाहु अकबर,” मैंने कहा। और मुझे बस दो चीज़ें पता थीं, अस्सलामु अलैकुम और अल्लाहु अकबर। जब मैंने अपना सिर ज़मीन पर रखा, और मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे, मुझे एक सुकून महसूस हुआ। मुझे सच में अल्लाह की मौजूदगी महसूस हुई। मैं ऐसा नहीं लगना चाहता कि मैं यहाँ शिर्क कर रहा हूँ, मुझे माफ़ करना, लेकिन मुझे लगा कि वो मेरी देखभाल कर रहा था। और तभी मुझे एहसास हुआ कि, हाँ, अल्लाह वहीं था। क्या मुसलमान बनने के बाद आपकी पूरी ज़िंदगी अचानक बदल गई? आपकी ज़िंदगी का turning point क्या था? क्या आपने ध्यान दिया? इस वीडियो को देखते समय आपको कोई विज्ञापन नहीं देखना पड़ा?
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तो, मुझे कई बार, उह, कई बार गोली लगी है, कुछ बार, पाँच बार अलग-अलग समय पर। आखिरी बार, मेरे सौतेले बेटे की जान चली गई। उसे दिल पर गोली लगी। हम एक 20 मिलियन डॉलर की ड्रग डील करने वाले थे, मैंने कहा था कि अगर ये काम ठीक से हो गया, तो मैं उस ज़िंदगी से हमेशा के लिए बाहर हो जाऊँगा। 20 मिलियन डॉलर बहुत बड़ा पैसा है। उस समय मेरा सप्लायर क्वींसलैंड से था। हम साउथ ऑस्ट्रेलिया में थे। उसकी इसे ख़रीदने में दिलचस्पी थी। लेकिन मुझे लगता है कि उसे ये सौदा करने में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं थी। मुझे लगता है वो सिर्फ़ मुझे मारना चाहता था। तो उसने मुझे यक़ीन दिलाया कि हम डील के लिए बात कर सकते हैं। तो मैं उससे मिलने गया, उसे लेने गया, और हम ड्राइव पर निकल गए। खैर, जब हम गाड़ी चलाने लगे, तो वह थोड़ा संदिग्ध सा लग रहा था। लेकिन मैंने खास ध्यान नहीं दिया। तो जब वो कार से उतरा, जब हमने उसे छोड़ा, तब पता चला कि वो मुझे मारने ही आया था। जब मैं उसे छोड़ने गया, तो उसने कहा, “मुझे यहाँ पार्क एरिया के पास उतार दो।” तो मैंने सोचा, ठीक है, ये सामान्य ही है। मेरा बेटा कार से उतरा, उसने उसे अलविदा कहा, जैसे मैंने बताया था। उनका तो दोस्त होना चाहिए था, है ना?
और जैसे ही उसने अलविदा कहा, उसने उसके सीने पर बंदूक रखी। उसने मेरे बेटे को गोली मार दी। मैंने तुरंत अपने बेटे को कार के अंदर खींच लिया। उसने कहा, “बाबा।” और फिर उसने बंदूक मेरी तरफ तान दी, और मैं ऐसे झुक गया, और पैर तुरंत पेडल पर रख दिया। बूम, बूम, बूम, बूम बूम, बूम, बूम, बूम। उसने मुझे गोली मारी और मुझे महसूस भी नहीं हुआ कि मुझे गोली लगी है। मुझे बस अपना बेटा याद आया। क्योंकि कोरोनर ने कहा था कि वो उसी वक्त मर गया था। उसका चेहरा नहीं पहचान में आ रहा था। उसकी हरी आँखें और... तो जब मैं गाड़ी चला रहा था.. मैं उसका मुँह पकड़कर उसे दुबारा ज़िंदा करने की कोशिश कर रहा था, समझ रहे हैं?
और मैं उसे वापस ज़िंदा करने की कोशिश कर रहा था, और एम्बुलेंस को कॉल किया, क्योंकि मैं समय पर अस्पताल नहीं पहुँच सकता था। तो मैंने कहा, “देखो, मुझसे बीच में मिलो।” तो मैंने ऐसा ही किया। और मैं उसे लगातार ज़िंदा करने की कोशिश कर रहा था। वो दिख रहा था, वो मर चुका है, लेकिन आप जानते हो आपका एक हिस्सा इसे मानना नहीं चाहता। जब मैं एम्बुलेंस से बात कर रहा था, तो मेरे मुँह से खून निकलने लगा। तो तो मैंने फोन नीचे रख दिया, माफ कीजिये । मैंने डैशबोर्ड पर हर तरफ खून थूका, और थूकता ही रहा। अब जिस खून को मैंने थूका, तभी मुझे एहसास हुआ कि मुझे भी गोली लगी है, और वो मेरे फेफड़ों से आ रहा है। तो अब मैंने खुद को इस हालत में रखा कि “या अल्लाह, मुझे माफ कर दे” समझ रहे हैं?
और मैंने अल्लाह से दुआ की, मैं सच में गिड़गिड़ा रहा था, कि मेरे सौतेले बेटे के लिए “ला इलाहा इल्लल्लाह” स्वीकार कर ले। वह उसी पर दुनिया से जाए। उसे यह “ला इलाहा इल्लल्लाह” अता कर दें, कृपया (प्लीज़) क्योंकि उसकी मौत हो चुकी थी। और मैंने अल्लाह से कहा, “मेरी हर गलती को माफ कर दे। कृपया मेरा ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ भी स्वीकार ले।” और मैं गाड़ी चला रहा था, तभी एम्बुलेंस आ गई। मैं कार से उतरा ताकि अपने बेटे के पास जा सकूँ। पुलिस ने मुझे रोक दिया। “विंस, प्लीज़।” तो मैं गिर पड़ा। अब मेरी पसलियों में दर्द शुरू हुआ। तभी मुझे एहसास हुआ कि मुझे पसलियों में भी गोली लगी है। तो उन्होंने मुझे एम्बुलेंस में डाला और अस्पताल ले गए। कोरोनर ने बताया कि मेरे बेटे की मौत हो गई है। क्योंकि गोली सीधे उसके दिल के आर-पार चली गई। और उसने अपने पिता की रक्षा करते हुए दम तोड़ा। वह मुसलमान था। तो, और उस वक़्त मैं गोलियों से भरा हुआ था। अस्पताल में मैंने अपनी पूरी कोशिश की। मैं ज़ंजीरों से बंधा हुआ था, और फोन पर कोर्ट से, ट्रायल से, सुप्रीम कोर्ट डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज से बात कर रहा था कि मुझे बेल दे दें, ताकि मैं अपने बेटे के जनाज़े में जा सकूँ, उसे ग़ुस्ल दे सकूँ। उसे गुस्ल देना और उसके जनाज़े का हिस्सा बनना। उस वक्त मेरे लिए सबसे मुश्किल बात यह थी कि मैं अस्पताल के बिस्तर पर पड़े हुए उसका जनाज़ा टीवी पर देख रहा था, वो भी जेल के अस्पताल के बिस्तर पर। ये मेरे लिए सबसे मुश्किल था। मुझे इसे झेलना पड़ा। और वल्लाही, ये मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी तकलीफ़ थी जो मैंने महसूस की। तो मैंने टीवी पर उसे दफ़न होते देखा, और बाकी सारी रस्में भी। जज ने मुझे बाहर आने नहीं दिया। मेरी ज़िंदगी जेल में बदल गई। अस्पताल वाली जेल से मुझे मेनस्ट्रीम जेल, एक हाई-सिक्योरिटी जेल, याताला जेल में ले जाया गया, उन्होंने मुझे जेल के अंदर ही सज़ा वाले हिस्से में रखा। वो हिस्सा अलग-थलग होता है। लेकिन तीन महीने इस हालत में गुज़र चुके थे, दस महीने नहीं, सिर्फ तीन महीने ही हुए थे, ढाई महीने के आसपास, मैं कुरआन पढ़ रहा था, और मैं सूरह अल-इमरान पढ़ रहा था, आयत 145। “अल्लाह की इजाज़त से, हर जान को मौत का स्वाद चखना है, और हर चीज़ पहले से लिखी हुई है।” अगर तुम इस दुनिया की अच्छी चीज़ें चाहो, अल्लाह तुम्हें देगा। और अगर तुम आख़िरत की अच्छी चीज़ें चाहो, अल्लाह वो भी तुम्हें देगा।” लेकिन “इस दुनिया की बेहतरी मिलेगी और आख़िरत की बेहतरी मिलेगी” मैंने वो हिस्सा पहले कभी नहीं पढ़ा था। जब मैं उस हिस्से पर पहुँचा जहाँ लिखा है कि हर चीज़ लिखी हुई है, जो बेचैनी की एक गाँठ-सी यहाँ थी, गिल्ट, बेटे का ग़म, डिप्रेशन, मैं कसम से कहता हूँ बदला लेने की नहीं?
सब खुल गया। मैं साँस ले पा रहा था। मेरे कंधों का बोझ कुछ ही सेकंड में उतर गया। मैं फूट-फूटकर रोने लगा, जैसा कभी ज़िंदगी में नहीं रोया था। ग़म की वजह से नहीं। मैं खुश था। मैं सच में बहुत खुश था। मैं सच में खुश था। सारा दुख तो नहीं गया, लेकिन उसने मुझे आज़ाद कर दिया। वो मुझे उस गहरी अँधेरा से निकाल लाया, और इसे समझाने का सिर्फ एक तरीका है जैसे आप पहाड़ पर चलते हो, और चलना मुश्किल होता है, है ना?
मेरा पहाड़ बिल्कुल मौत जैसी सीधी चढ़ाई थी। और मैं ऊपर पहुँचने के लिए नाखूनों और दाँतों से रेंग रहा था। लेकिन मेरे पकड़ने के लिए एक रस्सी थी। और जब भी मैं नीचे देखता, भेड़िए कूदते हुए मुझे फाड़ खाने के लिए, ऊपर आ रहे होते। वे भेड़िए मेरी भावनाएँ थीं, मेरी मानसिक हालत थी, मेरी सेहत थी। और कुरआन वो रस्सी थी। मैंने उसी रस्सी को पकड़ने का फैसला किया, भाई। और मुझे अल्लाह का शुक्रिया अदा करने में 45 मिनट, लगभग एक घंटा लगा। मैं उसका शुक्रिया अदा करना चाहता था। मैं उसका बहुत शुक्रिया करना चाहता था, समझ रहे हैं? मुझे 45 मिनट लग गए। आँसू रुक नहीं रहे थे, आप जानते हो, जब आप किसी से मोहब्बत करते हो। और आप उनके मदद के लिए इतने संतुष्ट और इतने शुक्रगुज़ार होते हैं?
हम तो दुनिया की बात कर रहे हैं, जहाँ आप उनके लिए रो पड़ते हैं, समझ रहे हैं?
“बहुत शुक्रिया, आपने मुझे बाहर निकाला।” ये तो ख़ालिक़ हैं। मैंने उसकी मौजूदगी महसूस की। उसी पल मेरा अल्लाह से रिश्ता पक्का हो गया, पूरा हो गया। मैंने यही दुआ की। मैंने उसका शुक्रिया किया। मैंने कहा, “शुक्रिया, अल्लाह।” मैंने अल्लाह से कहा, मैंने हाथ उठाए और कहा, “या रब्बी, या अल्लाह, मेरी हर गलती माफ कर दे।” मैंने उससे विनती की। मैंने कहा, “कृपया, अल्लाह।” और मैं यहाँ हूँ। मैं 15 साल से मुसलमान हूँ। मैं बिल्कुल परफ़ेक्ट नहीं हूँ। मैं आलिम नहीं हूँ, न शेख हूँ, न ही ऐसा दावा करता हूँ। मेरा इल्म बहुत कम है। मैं अल्लाह से मोहब्बत करता हूँ। मैं रसूलुल्लाह से मोहब्बत करता हूँ मैं दीन से मोहब्बत करता हूँ, सहाबा(companions) से मोहब्बत है, उमर इब्न ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अन्हु) जैसे। यही वो लोग हैं जिनकी हमें पैरवी करनी चाहिए। अफ़सोस की बात है कि हमारा नौजवान आज इस दुनिया में बिल्कुल खोता जा रहा है। तो यही मेरा सफ़र था। यही मेरा टर्निंग पॉइंट था। आपकी कुछ पोस्ट्स में हमने आपकी माँ को देखा है वो भी इस्लाम में दाख़िल हुई हैं। तो आपकी कहानी की शुरुआत से लेकर अंत तक उनकी क्या स्थिति रही?
अरे, आप खुद को रोक नहीं पाते, है ना?
ये मेरे लिए बहुत संवेदनशील बात है, लेकिन मैं पूरी कोशिश करूँगा, इंशाअल्लाह। मेरी माँ, मैं इसे जितना जल्दी हो सके, कह देता हूँ। मैं उनकी तस्वीर भी नहीं देख पाता। मैं उन्हें बहुत याद करता हूँ, लेकिन अल्लाह उन्हें जन्नतूल फिरदौस अता करे। आमीन। मेरी माँ और मैं बस सबसे अच्छे दोस्त थे। जब मुझे डिपोर्ट किया जा रहा था डिपोर्ट होने से ठीक पहले, मेरे पास उस हालत में 28 दिन बचे थे। लेकिन जब मुझे डिपोर्ट किया जा रहा था, मैं अस्पताल गया, डॉक्टरों के पास। अस्पताल और उन्हें स्टेज-4 कैंसर का पता चला, तो फिर जोवो spots थे वो बड़े होने लगे और आखिरकार वो फैलने भी लगे। तो मेरी माँ के मामले में, मैंने डॉक्टर से कहा, “उनसे उनके कैंसर के बारे में कुछ मत कहना।” और फिर वो मलेशिया आईं। मैं उन्हें अक्टूबर में मलेशिया लेकर आया। तो जब वो वहाँ आईं, मैंने सोचा, वाह। मैं बहुत भावुक हो गया। मेरी माँ यहाँ हैं। ठीक है, मैंने बाइबल ली। “माँ, बाइबल में लिखा है, यीशु कहते हैं, ‘मेरी इबादत मत करो।’” उन्होंने कहा, ‘मेरी इबादत मत करो। मैं तुम्हारा प्रभु नहीं हूँ, माँ।’” मैंने कहा, “क्या मुस्लिम उनकी इबादत करते हैं?” उन्होंने कहा, “नहीं।” “तो फिर आप क्यों करती हैं?” और मैं ये बात हर दिन कहता था। हर, हर दिन मैं कहता, “यीशु मसीह ने कहा है, शराब मत पीओ। सूअर का मांस मत खाओ।” “यीशु कैसे नमाज पढ़ते थे, माँ?” सब बाइबल से। इसका कुरआन से कोई लेना-देना नहीं, ठीक है?
रोजाना यही होता था। और हर दिन, हर दिन “माँ, मैं आपसे मोहब्बत करता हूँ।” “माँ, जज़ाकल्लाहु ख़ैरन।” और फिर आखिर में एक वक़्त ऐसा आया जब मैंने कहा, “माँ, क्या आपको लगता है यीशु मसीह?” “नहीं। देखो बेटा, यीशु मसीह ख़ुदा नहीं थे।” बूम। मेरा दिल। माफ करना, मैं अब भावुक हो रहा हूँ। और उन्होंने शाहादा पढ़ लिया। आप यक़ीन नहीं करोगे। उन्होंने कहा, “अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाह वा अशहदु अन्ना मुहम्मद रसूलुल्लाह।” बिना किसी गलती के। मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ। मैं उन्हें रिकॉर्ड कर रहा था। मैं रो रहा था और उन्हें रिकॉर्ड कर रहा था। देखिए, अल्लाह उन्हें कितना चाहता था। इस हद तक कि वो मुसलमान बन गईं, और अल्लाह ने उन्हें उनकी मौत पर पूरा करम अता किया। वो नींद में बहुत सुकून से तहज्जुद के वक़्त इस दुनिया से चली गईं, फज्र से ठीक पहले, जुमे के दिन, रमज़ान में, रमज़ान के आख़िरी 10 दिनों में। उनकी जनाजज़ेकी नमाज़ जुमे के दिन एक बिल्कुल नई मस्जिद में पढ़ी गई, और उन्हें एक बिल्कुल नई क़ब्र में दफ़नाया गया। अगर भाई विंस ने इस्लाम क़बूल न किया होता, तो आज वो क्या कर रहे होते?
अगर मैं ईमानदारी से कहूँ, तो या तो मैं कब्र में मरा पड़ा होता, किसी ने मेरी हत्या कर दी होती, या 30 साल से ज़्यादा की जेल काट रहा होता, या उम्र क़ैद, क्योंकि उस ज़िंदगी में या तो मैं उसे मार देता या किसी और को। लेकिन अल्लाहु अकबर, अल्लाह ने मुझे इस्लाम के लिए चुन लिया, भाई। वल्लाही, उसने मुझे अँधेरों से निकालकर रौशनी में ला दिया, और मुझे समझ, इल्म और हिकमत दी। अह, कैसी ज़िंदगी है। मुसलमान की ज़िंदगी कितनी खूबसूरत होती है। वल्लाही, वल्लाही। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की किस बात ने आपको सबसे ज़्यादा प्रभावित किया?
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की हर चीज़ हर मायने में, हर पहलू में, सबसे ऊँचे और सबसे खूबसूरत तरीके से बेहद शानदार और लाजवाब है। इस धरती पर कोई ऐसा इंसान, कोई ऐसी मख़लूक कभी नहीं बनाई गई, जो उनसे ज़्यादा मुकम्मल, खूबसूरत, रहमदिल और मोहब्बत करने वाली हो। एक सच्चा, अच्छा इंसान बनने के लिए, वो ही असली मिसाल हैं, असली रोल मॉडल। क्या हम उनके जैसे बन सकते हैं? नामुमकिन। लेकिन एक बात थी जो बाकी सब में सबसे ज़्यादा अलग थी। मैं उनकी सीरत पढ़ रहा था, चाँद के दो टुकड़े होने वाली घटना। और मैं पढ़ता गया और वाह। बस उनकी उम्र से लेकर हर चीज़ मतलब, ऐसी कोई भी बात नहीं है जो हमें गहराई से इतने भारी अंदाज में न छू जाए, समझ रहे हैं न?
लेकिन एक बात थी जिसने मुझे इतना रुला दिया, जब वो अपनी मौत के बिस्तर पर थे। सोचिए, आप मरने वाले हों। बेहोशी में आते-जाते हुए, कैसा महसूस होता होगा, सोचिए। उन्होंने अपने सहाबा से कहा, “मुझे मेरी लोगों के पास ले चलो। मैं उनसे बात करना चाहता हूँ।” और उन्होंने उनसे कहा, “नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम), आप नहीं जा सकते। आपकी तबीयत ठीक नहीं है, हालात ऐसे नहीं हैं।” मतलब, उन्होंने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की। लेकिन उन्होंने जाने की ज़िद की। और मुझे याद है, जब मैं ये पढ़ रहा था, लिखा था कि सहाबा उन्हें दोनों बाजुओं से सहारा देकर लिए जा रहे थे, और उनके पैर ज़मीन पर घिसट रहे थे वो चल भी नहीं पा रहे थे। देखो, अपनी उम्मत के लिए उनके दिल में कितनी मोहब्बत थी। मुझे तो उल्टी-सी लगती है तो मैं बिस्तर से भी नहीं उठ पाता। आप जानते हो वो कितना बुरा एहसास होता है?
यह शख़्स, यह खूबसूरत नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यह अल्लाह की मख़लूक़ चाहे वो जैसा भी महसूस कर रहे थे, वो अपने लोगों से आख़िरी दफ़ा बात करना चाहते थे। तो जब मैंने पढ़ा कि उनके पैर घिसट रहे थे, सोचो, उन्हें इसी हालत में लोगों के सामने लाया गया, मैं ज़ोर-ज़ोर से रो पड़ा। उन्होंने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए वो सब कुर्बान किया जिसे आप सोच भी नहीं सकते सहाबा ने अल्लाह के लिए और इस उम्मत के लिए ऐसी-ऐसी बातें कुर्बान कीं जो आप कल्पना भी नहीं कर सकते, तो हमें उनका शुक्रगुजार होने के लिए क्या करना चाहिए, आप जानते हैं?
तो वही हिस्सा था, सब कुछ मुझे छू गया, लेकिन उस हिस्से ने मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया। जब नबी मुहम्मद( सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) वो पहले शख्स थे जिन्होंने “अस्सलामु अलैकुम” कहा था। (आप पर सलामती हो)। और आप उनकी दाढ़ के पीछे का हिस्सा भी देख सकते थे। लेकिन जब वो अल्लाह की राह में मैदान में लड़ रहे होते थे, तो वो बिल्कुल शेर जैसे थे, एक सच्चे मुजाहिद, समझ रहे हैं? खालिद बिन वलीद (रज़ि अल्लाहु अन्हु), हमज़ा—इस्लाम के शेर। फिर अली (रज़ि अल्लाहु अन्हु), हुसैन, हसन, अबू उबैदा, उमर बिन ख़त्ताब, उस्मान, अबू बक्र, सबको देखो। come on! क्या हम सच में हॉलीवुड और म्यूज़िक इंडस्ट्री को फ़ॉलो कर रहे हैं? “ये ही असली लोग हैं…
खुदा।” और बहुत से नौजवान हैं जो उस लाइफ़स्टाइल को देख कर बड़े होते हैं, जो लाइफ़स्टाइल पहले आपकी थी। आप उन लोगों से क्या कहना चाहेंगे जो इस दुनिया में ही खुशियाँ तलाश करते रहते हैं?
इंद्रधनुष के आख़िर में कोई सोने का घड़ा नहीं होता। और सुरंग के आख़िर में कोई रोशनी भी नहीं होती। ये सब सिर्फ़ एक भ्रम है। और मैं आपको कुरआन से एक ऐसी बात बताने वाला हूँ जो सुनकर हैरानी होगी। ये मज़ाक नहीं है। उस लाइफ़स्टाइल में वफ़ादारी नाम की कोई चीज़ नहीं होती। वफ़ादारी उसी की होती है जो सबसे ज़्यादा पैसा बना कर दे। और अगर आप पैसे बनाने में अच्छे नहीं हो, तो आप बोझ समझे जाते हो लेकिन मैं कुरआन से ये बात कहना चाहता हूँ यह बात हर किसी के लिए चीज़ों को साफ़ कर देगी। अगर आपके पास थोड़ी-सी समझ, थोड़ी-सी अक़्ल है, थोड़ी-सी शराफ़त और खुला दिमाग़ है, तो यह आयत उन सभी गुनहगारों के लिए है। यह आयत वहाँ बाहर मौजूद हर अरबपति के लिए है। यह आयत हर राजा के लिए है, और उन सबके लिए जो ज़ुल्म झेल रहे हैं, और उनके लिए भी जो पैसे कमाना चाहते हैं चाहे उस लाइफ़स्टाइल में हों या नहीं पर जो इस राह में जाना चाहते हैं मैं आपको यह आयत बताता हूँ। अल्लाह कुरआन में फ़रमाता है, और ये बात सीधे उन्हीं लोगों को संबोधित है। “अगर तुम कयामत के दिन दुनिया की सारी दौलत लेकर भी मेरे पास आओ। अब सोचिए, अल्लाह कह रहा है, दुनिया की सारी दौलत लेकर भी अगर तुम क़यामत के दिन मेरे पास आओ और उसे फिरौती की तरह पेश करो, “कृपया अल्लाह, मुझे जन्नत दे दो या मुझे दोबारा मौका दे दो।” अल्लाह कहता है, “इसका कोई फ़ायदा नहीं। आज हिसाब-किताब का दिन है।” तुम्हारा सब कुछ खत्म। तो हम किसके पीछे भाग रहे हैं?
तुम किस पैसे के पीछे भाग रहे हो? आपको कितने मिलियन चाहिए? आपको कितने बिलियन चाहिए? कौन-सी फ़रारी चलाना चाहते हो? तो भाई, अभी आप कौन-से प्रोजेक्ट कर रहे हैं? मेरी NGO का नाम “सहाबा” है, जिसका मतलब है नबी ﷺ के साथियों का समूह। ‘99’ अल्लाह के 99 नामों और उनकी गुणों को दर्शाता है। और हमारी टी-शर्ट के पीछे वह हदीस लिखी है जिसका मैंने आपको पहले जिक्र किया था, कि तुम में सबसे बेहतरीन वो हैं जो इंसानियत को सबसे ज़्यादा फ़ायदा पहुँचाते हैं। तो हम कोशिश करते हैं कि वे किकबॉक्सिंग, मुए थाई बॉक्सिंग करें, और सेल्फ-डिफ़ेन्स सीखें। हम चैरिटी भी करते हैं वगैरह- वग़ैरह!
हम हर तरह से मुस्लिम कम्युनिटी के लिए खड़े होते हैं, दीन ही उनके लिए सब कुछ है। हमारे लिए भी। फ़िलिस्तीन के लिए हम काम करते हैं, मतलब, वहाँ तक फ़ूड ट्रक पहुँचाते हैं। बस यही सब काम हम करते हैं। जो लोग स्पेगेटी पास्ता पर केचप डालते हैं, आप उनके साथ क्या करना चाहेंगे? खैर, मैं उन लोगों के साथ वही करना चाहूँगा जो केचप स्पेगेटी बोलोग्नीज़ पास्ता की प्लेट पर डालते हैं, उन्हें उम्रभर के लिए गिरफ्तार कर लो और चाबी फेंक दो। उन्हें गिरफ़्तार करो। शायद उनका चेहरा ही केचप में डुबो देना चाहिए? नहीं, नहीं, नहीं,उन्हें ज़िंदगी भर के लिए जेल में डाल दो। क्या ये जुर्म है? हाँ, पूरा जुर्म है । पिज़्ज़ा पर पाइनऐप्पल तो मत डालो, कम से कम इटली में तो नहीं। और इटली में अपनी सॉस पर केचप भी मत डालना, ठीक है?
मेरा मानना है कि उन्हें किसी संस्थान में बंद कर देना चाहिए। शायद जेल भी नहीं, बल्कि किसी मानसिक संस्थान में यह समझने के लिए कि आखिर उनके साथ दिक्कत क्या है। भला कोई स्पेगेटी की प्लेट पर टोमैटो सॉस कैसे डाल सकता है?
जहाँ शेफ ने लहसुन को बारीक काटा है, ऑलिव ऑयल पैन में डाला है, उसे टमाटर पेस्ट के साथ कारमेलाइज़ होने तक सिज़ल किया है ताकि उसकी खटास निकल जाए ताकि आपको जलन न हो, फिर उसमें बेसिल डालता है, फिर सॉस, फिर नमक, और बाकी सारी सामग्री। और फिर पूरा 20 मिनट का ये तरीका करता है। और उस 20 मिनट के बाद, वह उसे और 30 मिनट पकाता है। और उस सॉस का सही स्वाद लाने के लिए और वह बीच-बीच में चखकर उसका फ्लेवर ठीक करता है, इतनी मेहनत करता है, और आप आते हो एक टमाटर पेस्ट लेकर जिसमें चीनी मिली होती है, और उसे स्पेगेटी के ऊपर डाल देते हो। ज़िंदगी भर की जेल। बस यही। और जो पिज़्ज़ा पर पाइनऐप्पल डालते हैं, उन्हें किसी खेत में कम से कम 15 साल के लिए पत्थर तोड़ने भेज देना चाहिए। पिज़्ज़ा पर फल? या अल्लाह!
क्या आप इटालियन में कुछ कहना चाहेंगे क्योंकि आपकी इटालियन पृष्ठभूमि है, मेरी इटालियन इतनी अच्छी नहीं है, लेकिन मैं अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करता हूँ। समझ रहे हैं ना? सबसे पहले, मैं सलाम कहना चाहता हूँ, कावी दी तिरिनी, सालेरनो, अपने परिवार को। फोकारेली, सवास्टानी। Many kisses to all of you. आप सबको बहुत सारे प्यार और दुआएँ। और जो इटालियन इटली में हैं, उनके लिए जिनके पास… दिमाग में समझ-बूझ है, रोमन कैथोलिक धर्म को भूल जाइए, इस ईसाइयत को भी छोड़ दीजिए। पूरे सम्मान के साथ कह रहा हूँ, एक कुरआन उठाइए, उसे पढ़िए। और मुसलमानों की ज़िंदगी के करीब आइए। और आप देखेंगे कि आपकी ज़िंदगी हमेशा सुकून में रहेगी। मेरे सारे परिवार वाले, मेरे सारे दोस्त जो इटली में हैं, मुस्लिम बन जाइए। तकबीर! अल्लाहु अकबर!
क्या आप हमें अपनी ज़िंदगी के बारे में बता सकते हैं?
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह। मैं बहुत विनम्र महसूस करता हूँ, और आपके पॉडकास्ट में बुलाने के लिए शुक्रिया। मेरा जन्म इटली में सलेर्नो नामक शहर में हुआ था। तो जब मैं छह साल का था, मैंने अपनी ज़िंदगी की पहली हिजरत इटली से ऑस्ट्रेलिया, साउथ ऑस्ट्रेलिया, एडेलेड की तरफ की। मैं 14 साल की उम्र से ही गैंगस्टर था। मैंने सबसे बेहतरीन लोगों के साथ उठना-बैठना किया। जब मैं सबसे बेहतरीन कहता हूँ , इसका मतलब नाइटक्लब के बॉस और बाकी सब से है। मैं गैंग की दुनिया में शामिल रहा हूँ और इतनी गहराई तक चला गया कि मैं एक पूरे स्टेट का बॉस बन गया, ऑस्ट्रेलिया के सबसे बदनाम क्रिमिनल बाइकर ग्रुप का। मैं बहुत-बहुत सालों तक एक क्रिमिनल रहा हूँ, इस हद तक कि मेरे सौतेले बेटे ने मेरी बाँहों में ही दम तोड़ दिया। तो उसके बाद, मैंने इस्लाम अपना लिया। तो इस्लाम से पहले आपकी ज़िंदगी आस्था के मामले में कैसी थी?
आप किस पर विश्वास करते थे?
मैं रोमन कैथोलिक था। मैं हमेशा ईश्वर पर विश्वास करता था। जेल में भी मैं प्रार्थना करता था। मैं क्रॉस बनाता था और प्रार्थना करता था। हम क्रॉस पहनते थे। माफिया भी बहुत धार्मिक होते हैं, विश्वास करें या ना करें। आप जानते हैं, वे अपने गुनाह स्वीकार करने के लिए पादरी के पास भी जाते हैं। कुछ को गिल्ट होता है। लेकिन हमारे पास दोनों दुनिया थीं। आप जातेऔर अपने गुनाह स्वीकार करते। वे आपको हेल मैरी पढ़ने को कहते और ऐसी बातें करते। और जैसे ही आप चर्च से बाहर निकलते, आप वापस अपने पेजर पर होते। "मैं तुमसे यहाँ मिलूँगा।" "वहाँ ड्रग्स बेच रहा हूँ।" तो हमारे लिए, क्रिस्चियन, यानी रोमन कैथोलिक आस्था में, ये संस्कृति और परंपरा थी। ऐसे ही होना, ये हमारे डीएनए का हिस्सा था, आप समझ रहे हैं ना?
और लोग इसे समझते नहीं हैं। हमें ये यक़ीन दिलाया गया था कि अगर हम पादरी के पास जाएँ, वो दरवाज़ा खोलते हैं, छोटी सी खिड़की खुलती है, और आप कहते हो, "फ़ादर, मैंने गुनाह किया है। मैंने एक आदमी को गोली मारी। मैंने उसे नहीं मारा। मैंने ड्रग्स बेचे हैं। "मैं बदलना चाहता हूँ, लेकिन जानते हो, मैंने ये किया, वो किया है।" "मेरे बेटे, आने के लिए शुक्रिया। यीशु तुमसे प्यार करते हैं। 15 हेल मैरी पढ़ लो। ये कर लो।" और कभी-कभी आप बॉक्स में चैरिटी डाल देते हो और बस हो गया। बहुत आसान। और आप सोचते थे कि आपको माफ कर दिया गया? हाँ। हमें इसी पर यक़ीन दिलाया गया था। इस्लाम से पहले आपकी ज़िंदगी कैसी थी? आप जिस माहौल में थे, आपकी आदतें, आपकी पसंद, आपके दिन कैसे थे?
एक इटालियन होने के नाते, आप बड़े होते हैं ये जानते हुए कि माफिया दुनिया चलाता है। अब, एक इटालियन होने के नाते, मैं देशभक्त हूँ। तो हम अपनी उँगलियों में रिंग पहनते थे। जानते हैं, हम माफिया का हिस्सा होते थे। इटालियन माफिया का हिस्सा होते हैं। हमारे पास माफिया फैमिली मेंबर और गैंगस्टर्स होते हैं। हम ड्रग व्यापार चलाते थे। हम राजनीति चलाते थे। 14 साल की उम्र में सड़क पर ड्रग्स बेचते हुए, मैं नाइटक्लब में जाता था जहाँ मालिक या एडल्ट इंडस्ट्रीज़, स्ट्रिप जॉइंट्स, ऐसी चीज़ें होती थीं। इसलिए मैं नाइटक्लब में इंतज़ार नहीं करता था। बाउंसर मेरी रक्षा करते थे। अगर पुलिस उस जगह में आ जाती, तो उनका लाइसेंस रद्द हो जाता। मैं सिर्फ 14, 15, 16, 17 साल का था। आपकी उम्र 18 या उससे ज़्यादा होनी चाहिए थी। लेकिन मुझे उस सड़क के सभी नाइटक्लबों से सम्मान मिलने का सौभाग्य मिला था। आपको पता है, मैं दुश्मन पर गोली चलाने के लिए हथियार लेकर चलता था। हर बार जब मुझे गोली लगी है, वो बहुत नजदीक से लगी है। दूर से नहीं। हाँ, हमेशा बेहद नजदीक से ही लगी है। तो, मेरे सिर में यहाँ एक गोली फँसी हुई थी। तो वो उन्होंने काटकर निकाल दी। तो मुझे यहाँ गोली लगी थी। मुझे यहाँ भी गोली लगी थी। और ये यहाँ से होकर बाहर निकली। मुझे यहाँ से गोली लगी, दो पसलियाँ टूट गईं। वो मेरे दिल में जाना चाहिए था, लेकिन वो मेरी छाती से बाहर निकल गई। एक गोली ने मेरी त्वचा को फाड़ दिया, लगभग मेरी रीढ़ की नसों के पास तक। मैं ज़िंदगी भर के लिए paralyze हो जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब मैं झुका, तब वो निकल गई। दूसरी यहाँ है। मुझे पैर में भी गोली लगी थी और मुझ पर गोली चलाई गई थी। और एक बार बम से हमला करने की भी कोशिश की गई। तो उन्होंने एक बम लगाया था वे मेरे घर के आसपास बम लगाने की कोशिश कर रहे थे। जब उन्होंने बम निकाला और मैं कार से करीब 20 मीटर दूर था रात में, सुबह करीब 5 या 5:30 बजे, उन्होंने कार से बम बाहर निकाला। जैसे ही उसने बम को छुआ — धमाका हो गया। तो, मेरे पास पैसे थे। मेरे पास कारें थीं। मेरे पास बाइक थीं। मेरा अपना बिज़नेस था। मेरे पास ड्रग्स थे, नाइटक्लब में इज़्ज़त थी, लड़कियाँ थीं और बाकी सब भी था। जितना भी चमक-धमक आप सोच सकते हैं, सब था। मैं अब उस लेवल पर पहुँच चुका था, ये अच्छा लगता था। ग़लत मत समझिए। वो एहसास अच्छा था, ताकतवर महसूस होता था और बाकी सब भी। लेकिन अजीब बात ये थी कि जब मैं घर लौट रहा होता था और अकेले कार चलाते हुए घर जा रहा होता था, मुझे हमेशा अंदर से खालीपन महसूस होता था। यानी वह समय जब आप घर लौटते हैं, या सोने जाते हैं या सुबह उठते हैं— आपकी बीवी और बच्चे थे, लेकिन आपको अंदर एक खालीपन महसूस होता था। और ये हमेशा मेरे अंदर था। मैंने उस समय एक साल में 1.23 मिलियन डॉलर कमाए थे। ये बहुत सारे पैसे हैं। और मैं उसे ख़र्च भी कर देता था। वर्साचे के कपड़े, लिमोज़िन, गाड़ियाँ, ये, वो सब। लेकिन उसके बाद बस स्पष्ट ख़ालीपन का एहसास होता था। आपने पहली बार इस्लाम के बारे में कैसे सुना और आपका इस्लाम की तरफ़ सफ़र कैसे शुरू हुआ?
जब मेरा हेल्स एंजेल्स के साथ झगड़ा हुआ, तो मैं पर्थ के एक इराकी शख़्स के साथ जुड़ गया। मेरा ख्याल है कि उन्हें स्कॉर्पियन किंग्स या कुछ ऐसा कहते थे। मुझे ठीक से नहीं पता, लेकिन उन्होंने मेरे बारे में सुना था और वे एडिलेड आकर मेरे साथ बिज़नेस करना और हाथ मिलाना चाहते थे। अब, मुझे पता है ये पागलपन लगेगा और ऐसा लगेगा जैसे मैं किसी गुफा में रहता रहा हूँ, लेकिन मुझे इस्लाम या मुसलमानों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मुझे सच में नहीं पता था। तो ये अरब लोग आए, लंबी कहानी को छोटा करूँ तो, जब वे आए और मेरे साथ मिले, तो हमारे दुश्मन एक ही थे। हम एक नाइटक्लब गए, जो पूरी तरह भरा हुआ था। और कुछ चीजें होती थीं, गोलीबारी, फायरिंग, लड़ाई-झगड़ा, और फिर हम उनके घर वापस जाते थे, और वे लंबा सा कपड़ा पहनते थे, वे वज़ू करते थे, मुझे तब नहीं पता था, वे खुद को धो रहे थे, और वे नमाज़ पढ़ना शुरू कर देते थे। मैं सोच रहा था, क्या हो रहा है?
उसने कहा, "वे नमाज पढ़ रहे हैं।" "नमाज़ क्या होती है?" "वे मुसलमान हैं।" ओह, अच्छा। मुझे कभी पता नहीं था कि वे मुसलमान हैं। मैंने कहा, वो क्या होता है?
वह बोला, तुम जानते हो, ये वो। और पहली रात, मैं लाउंज एरिया में था, और वे अली, हमज़ा, और नबी ﷺ बारे में बात करने लगे। और अब मैं सच में बहुत उत्सुक था। वे योद्धाओं के बारे में बात कर रहे थे, अली, जो एक योद्धा थे, इस्लाम, वे ईश्वर से कितना प्यार करते थे, वे ईश्वर के प्रति कितने वफ़ादार थे। उनका ईमान ही सब कुछ था। मैं सोच रहा हूँ, वाह, और ये लोग योद्धा हैं। और फिर उन्होंने पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बारे में बात की। क्या कहानी थी। हम तो बस इतना जानते थे कि हमारे लिए यीशु मसीह ही आख़िरी थे, पैग़ंबर, मसीहा, ईश्वर। यह बाइबिल में है, आप जानते हैं ना?
और फिर उन्होंने यीशु मसीह के बारे में बात करना शुरू किया। मैंने उनसे कहा, मैं खड़ा हो गया। मैंने कहा, आप यीशु मसीह के बारे में क्या जानते हैं? वह मेरे प्रभु हैं। वह मेरे, आप जानते हैं, मसीहा हैं।” मुझे बोलना चाहिए। मेरा मतलब, मैं बाइबल के बारे में जानता हूँ। “नहीं, नहीं, नहीं, विंस, नहीं। हम उनसे प्यार करते हैं।” "हूँ?" हम उनको बहुत चाहते हैं, हम उनसे बहुत प्यार करते है। हम उनका सम्मान करते है। हम उनका पालन करते है। मदर मैरी...
वर्जिन मैरी, बाइबल की कहानी...” वे इसके बारे में क़ुरान में बात करने लगे। और जिसने मुझे चकित किया, वह यह था कि क़ुरआन में मदर मैरी का एक पूरा अध्याय है, बाइबल में मदर मैरी का सिर्फ़ चार-पाँच बार ज़िक्र है, अगर मैं ग़लत नहीं हूँ तो। बस जिक्र हुआ है। लेकिन यहाँ तो मदर मैरी का पूरा एक चैप्टर है, मतलब, ईमान वालों की माँ, सही?
और फिर यीशु मसीह की कहानी और जितना वो बोलते गए, मैं मज़ाक नहीं कर रहा, यह ऐसा था जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा फ़िल्म या शो देख रहा हो। जैसे मैं उत्सुक था। उसी पल, मेरे दिल में ये एहसास हुआ कि चाहे वहाँ नशा था या नहीं, अल्लाह ने मुझे हिदायत दी थी। और मैं बहुत उत्सुक था। अब, रोमन कैथोलिकों की दिक्कत ये है, है ना, कि हम एक परंपरा और संस्कृति को फ़ॉलो करते हैं। जब आप बाइबल पढ़ते हैं, मैंने बाइबल पढ़ी है। मैं ये नहीं कह रहा कि मैं बाइबल का मास्टर हूँ। लेकिन मुझे बाइबल की कुछ बातें पता हैं। जैसे कि, यीशु मसीह ने अपनी क़ौम से कहा, "ऐ मेरी कौम, मेरी इबादत मत करो। मैं तुम्हारा ईश्वर नहीं हूँ।" बिल्कुल साफ़। बहुत सीधी बात है, है ना?
ठीक है। लेकिन हम उनकी पूजा करते हैं। हम बाइबल पढ़ते हैं, लेकिन बस पढ़ते ही हैं। हम सोचते नहीं थे। वो बस ईमान, संस्कृति और परंपरा की वजह से था। यीशु मसीह ने कहा, “सूअर का मांस मत खाओ।” कैथोलिक लोग सूअर का मांस खाते हैं। हम सूअर का मांस नहीं खाते। यीशु मसीह ने कहा, “शराब से दूर रहो।” ये हर बड़े गुनाह के दरवाज़े खोल देती है। यीशु मसीह ने बाइबल में कहा है “किसी भी तरह की मूर्ति की पूजा मत करो, उसके आगे मत झुको, किसी भी मूर्ति, प्रतिमा या किसी भी प्राणी से प्रार्थना मत करो, चाहे वो आसमान का, ज़मीन का , या पानी के नीचे का देवता हो। हमारे पिता, ईश्वर से सीधे प्रार्थना करो, क्योंकि ईश्वर ईर्ष्यालु हैं।” हम क्रॉस से, मदर मैरी से, बेबी जीसस से प्रार्थना करते हैं। लेकिन हम यही करते हैं। खैर, लंबी बात छोड़ें, वे यीशु मसीह की बात कर रहे थे। वे बाइबल की बात कर रहे थे। तो अब सब कुछ समझ आने लगा। फिर दूसरी रात, तीसरी रात, पैग़ंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की दिल छू लेने वाली कहानियाँ, सही?
और अली, जिन्हें वे ‘अली द मैग्निफिसेंट’ कहते थे। और वो सच में कमाल के थे। माशाअल्लाह! अल्लाह उनसे राज़ी हों! और मैं इस कहानी में इतना डूब गया था, बेहद ज़्यादा दिलचस्पी हो गई थी। और फिर बाइबल में विरोधाभास दिखने लगा। मेरा मतलब, हमें सिखाया जाता है कि शैतान, शैतान, इब्लिस, यीशु मसीह को पकड़कर 40 दिन और 40 रातों तक रेगिस्तान में लेकर चला गया, और फिर उसने, उसने यीशु मसीह से कहा यही मेरा मतलब है बाइबल पढ़ने से, ठीक है? उसने कहा, “अपने ईश्वर के प्रति अपना ईमान छोड़ दो।” ये उसने यीशु से कहा, है ना? “अपने ईश्वर के प्रति अपना ईमान छोड़ दो और अपनी वफ़ादारी मुझे दे दो।” क्या इससे वो खुदा या खुदा का पैग़ंबर बन जाता है आप समझ रहे हैं मैं क्या कहना चाहता हूँ?
बाइबल में इतनी सारी बातें हैं जो बताती हैं कि यीशु खुदा नहीं थे। यहाँ तक कि यीशु ने कहा, “मेरे पिता की इबादत करो, तुम्हारे पिता, मेरे खुदा और तुम्हारे खुदा की।” तो ये सारी बातें सामने आने लगीं। और मैं परेशान होने लगा। कैसे उन्होंने हमसे झूठ बोला?
तीसरी सुबह, मैं बाहर निकल रहा था। उसने दरवाज़ा खोला, मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया। मैंने कहा, “बस हो गया।” मैंने कहा, “मैं मुसलमान कैसे बनूँ?” मैंने कहा, “खुदा एक ही है, अल्लाह। और यीशु मसीह एक संदेशवाहक थे, पैग़ंबर, जो मरियम(अलैहिस्सलाम) से पैदा हुए थे।” ये दोनों मुसलमान अब बहुत खुश हो गए। "मेरे बाद दोहराओ, विंस।" "तैयार हो?" मैंने कहा, "हाँ, मैं तैयार हूँ।" “अशहदु अन ला इलाहा इल्लल्लाह व अशहदु अन्ना मुहम्मद रसूलुल्लाह।” मैंने कहा, "मैं इसे दोहराता हूँ, ठीक है?" “मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई ईश्वर नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (स॰अ॰व॰) उसके रसूल हैं।” देखिये, कितना लंबा है, है ना?
लेकिन मैंने पहली बार में बिना गलती के बोल दिया। सच में। जैसे नदी की तरह बह रहा था। मैंने उसे नहीं कहा, मैंने उसे नहीं कहा, रुको ये करो वो करो। उसने इसे रुक रुक कर के नहीं कराया। उसने कहा, “अशहदु अन ला इलाहा इल्लल्लाह... सब चलता रहा। वो बोला “नहीं भाई, तुमने कह दिया।” मुझे गले लगाया, “मैं तुमसे प्यार करता हूँ।” “तकबीर!” “अल्लाहु अकबर!” मैंने कहा, “सच में?
क्या मैं मुसलमान हूँ?” मैंने कहा। “अल्लाहु अकबर,” मैंने कहा। और मुझे बस दो चीज़ें पता थीं, अस्सलामु अलैकुम और अल्लाहु अकबर। जब मैंने अपना सिर ज़मीन पर रखा, और मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे, मुझे एक सुकून महसूस हुआ। मुझे सच में अल्लाह की मौजूदगी महसूस हुई। मैं ऐसा नहीं लगना चाहता कि मैं यहाँ शिर्क कर रहा हूँ, मुझे माफ़ करना, लेकिन मुझे लगा कि वो मेरी देखभाल कर रहा था। और तभी मुझे एहसास हुआ कि, हाँ, अल्लाह वहीं था। क्या मुसलमान बनने के बाद आपकी पूरी ज़िंदगी अचानक बदल गई? आपकी ज़िंदगी का turning point क्या था? क्या आपने ध्यान दिया? इस वीडियो को देखते समय आपको कोई विज्ञापन नहीं देखना पड़ा?
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तो, मुझे कई बार, उह, कई बार गोली लगी है, कुछ बार, पाँच बार अलग-अलग समय पर। आखिरी बार, मेरे सौतेले बेटे की जान चली गई। उसे दिल पर गोली लगी। हम एक 20 मिलियन डॉलर की ड्रग डील करने वाले थे, मैंने कहा था कि अगर ये काम ठीक से हो गया, तो मैं उस ज़िंदगी से हमेशा के लिए बाहर हो जाऊँगा। 20 मिलियन डॉलर बहुत बड़ा पैसा है। उस समय मेरा सप्लायर क्वींसलैंड से था। हम साउथ ऑस्ट्रेलिया में थे। उसकी इसे ख़रीदने में दिलचस्पी थी। लेकिन मुझे लगता है कि उसे ये सौदा करने में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं थी। मुझे लगता है वो सिर्फ़ मुझे मारना चाहता था। तो उसने मुझे यक़ीन दिलाया कि हम डील के लिए बात कर सकते हैं। तो मैं उससे मिलने गया, उसे लेने गया, और हम ड्राइव पर निकल गए। खैर, जब हम गाड़ी चलाने लगे, तो वह थोड़ा संदिग्ध सा लग रहा था। लेकिन मैंने खास ध्यान नहीं दिया। तो जब वो कार से उतरा, जब हमने उसे छोड़ा, तब पता चला कि वो मुझे मारने ही आया था। जब मैं उसे छोड़ने गया, तो उसने कहा, “मुझे यहाँ पार्क एरिया के पास उतार दो।” तो मैंने सोचा, ठीक है, ये सामान्य ही है। मेरा बेटा कार से उतरा, उसने उसे अलविदा कहा, जैसे मैंने बताया था। उनका तो दोस्त होना चाहिए था, है ना?
और जैसे ही उसने अलविदा कहा, उसने उसके सीने पर बंदूक रखी। उसने मेरे बेटे को गोली मार दी। मैंने तुरंत अपने बेटे को कार के अंदर खींच लिया। उसने कहा, “बाबा।” और फिर उसने बंदूक मेरी तरफ तान दी, और मैं ऐसे झुक गया, और पैर तुरंत पेडल पर रख दिया। बूम, बूम, बूम, बूम बूम, बूम, बूम, बूम। उसने मुझे गोली मारी और मुझे महसूस भी नहीं हुआ कि मुझे गोली लगी है। मुझे बस अपना बेटा याद आया। क्योंकि कोरोनर ने कहा था कि वो उसी वक्त मर गया था। उसका चेहरा नहीं पहचान में आ रहा था। उसकी हरी आँखें और... तो जब मैं गाड़ी चला रहा था.. मैं उसका मुँह पकड़कर उसे दुबारा ज़िंदा करने की कोशिश कर रहा था, समझ रहे हैं?
और मैं उसे वापस ज़िंदा करने की कोशिश कर रहा था, और एम्बुलेंस को कॉल किया, क्योंकि मैं समय पर अस्पताल नहीं पहुँच सकता था। तो मैंने कहा, “देखो, मुझसे बीच में मिलो।” तो मैंने ऐसा ही किया। और मैं उसे लगातार ज़िंदा करने की कोशिश कर रहा था। वो दिख रहा था, वो मर चुका है, लेकिन आप जानते हो आपका एक हिस्सा इसे मानना नहीं चाहता। जब मैं एम्बुलेंस से बात कर रहा था, तो मेरे मुँह से खून निकलने लगा। तो तो मैंने फोन नीचे रख दिया, माफ कीजिये । मैंने डैशबोर्ड पर हर तरफ खून थूका, और थूकता ही रहा। अब जिस खून को मैंने थूका, तभी मुझे एहसास हुआ कि मुझे भी गोली लगी है, और वो मेरे फेफड़ों से आ रहा है। तो अब मैंने खुद को इस हालत में रखा कि “या अल्लाह, मुझे माफ कर दे” समझ रहे हैं?
और मैंने अल्लाह से दुआ की, मैं सच में गिड़गिड़ा रहा था, कि मेरे सौतेले बेटे के लिए “ला इलाहा इल्लल्लाह” स्वीकार कर ले। वह उसी पर दुनिया से जाए। उसे यह “ला इलाहा इल्लल्लाह” अता कर दें, कृपया (प्लीज़) क्योंकि उसकी मौत हो चुकी थी। और मैंने अल्लाह से कहा, “मेरी हर गलती को माफ कर दे। कृपया मेरा ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ भी स्वीकार ले।” और मैं गाड़ी चला रहा था, तभी एम्बुलेंस आ गई। मैं कार से उतरा ताकि अपने बेटे के पास जा सकूँ। पुलिस ने मुझे रोक दिया। “विंस, प्लीज़।” तो मैं गिर पड़ा। अब मेरी पसलियों में दर्द शुरू हुआ। तभी मुझे एहसास हुआ कि मुझे पसलियों में भी गोली लगी है। तो उन्होंने मुझे एम्बुलेंस में डाला और अस्पताल ले गए। कोरोनर ने बताया कि मेरे बेटे की मौत हो गई है। क्योंकि गोली सीधे उसके दिल के आर-पार चली गई। और उसने अपने पिता की रक्षा करते हुए दम तोड़ा। वह मुसलमान था। तो, और उस वक़्त मैं गोलियों से भरा हुआ था। अस्पताल में मैंने अपनी पूरी कोशिश की। मैं ज़ंजीरों से बंधा हुआ था, और फोन पर कोर्ट से, ट्रायल से, सुप्रीम कोर्ट डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज से बात कर रहा था कि मुझे बेल दे दें, ताकि मैं अपने बेटे के जनाज़े में जा सकूँ, उसे ग़ुस्ल दे सकूँ। उसे गुस्ल देना और उसके जनाज़े का हिस्सा बनना। उस वक्त मेरे लिए सबसे मुश्किल बात यह थी कि मैं अस्पताल के बिस्तर पर पड़े हुए उसका जनाज़ा टीवी पर देख रहा था, वो भी जेल के अस्पताल के बिस्तर पर। ये मेरे लिए सबसे मुश्किल था। मुझे इसे झेलना पड़ा। और वल्लाही, ये मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी तकलीफ़ थी जो मैंने महसूस की। तो मैंने टीवी पर उसे दफ़न होते देखा, और बाकी सारी रस्में भी। जज ने मुझे बाहर आने नहीं दिया। मेरी ज़िंदगी जेल में बदल गई। अस्पताल वाली जेल से मुझे मेनस्ट्रीम जेल, एक हाई-सिक्योरिटी जेल, याताला जेल में ले जाया गया, उन्होंने मुझे जेल के अंदर ही सज़ा वाले हिस्से में रखा। वो हिस्सा अलग-थलग होता है। लेकिन तीन महीने इस हालत में गुज़र चुके थे, दस महीने नहीं, सिर्फ तीन महीने ही हुए थे, ढाई महीने के आसपास, मैं कुरआन पढ़ रहा था, और मैं सूरह अल-इमरान पढ़ रहा था, आयत 145। “अल्लाह की इजाज़त से, हर जान को मौत का स्वाद चखना है, और हर चीज़ पहले से लिखी हुई है।” अगर तुम इस दुनिया की अच्छी चीज़ें चाहो, अल्लाह तुम्हें देगा। और अगर तुम आख़िरत की अच्छी चीज़ें चाहो, अल्लाह वो भी तुम्हें देगा।” लेकिन “इस दुनिया की बेहतरी मिलेगी और आख़िरत की बेहतरी मिलेगी” मैंने वो हिस्सा पहले कभी नहीं पढ़ा था। जब मैं उस हिस्से पर पहुँचा जहाँ लिखा है कि हर चीज़ लिखी हुई है, जो बेचैनी की एक गाँठ-सी यहाँ थी, गिल्ट, बेटे का ग़म, डिप्रेशन, मैं कसम से कहता हूँ बदला लेने की नहीं?
सब खुल गया। मैं साँस ले पा रहा था। मेरे कंधों का बोझ कुछ ही सेकंड में उतर गया। मैं फूट-फूटकर रोने लगा, जैसा कभी ज़िंदगी में नहीं रोया था। ग़म की वजह से नहीं। मैं खुश था। मैं सच में बहुत खुश था। मैं सच में खुश था। सारा दुख तो नहीं गया, लेकिन उसने मुझे आज़ाद कर दिया। वो मुझे उस गहरी अँधेरा से निकाल लाया, और इसे समझाने का सिर्फ एक तरीका है जैसे आप पहाड़ पर चलते हो, और चलना मुश्किल होता है, है ना?
मेरा पहाड़ बिल्कुल मौत जैसी सीधी चढ़ाई थी। और मैं ऊपर पहुँचने के लिए नाखूनों और दाँतों से रेंग रहा था। लेकिन मेरे पकड़ने के लिए एक रस्सी थी। और जब भी मैं नीचे देखता, भेड़िए कूदते हुए मुझे फाड़ खाने के लिए, ऊपर आ रहे होते। वे भेड़िए मेरी भावनाएँ थीं, मेरी मानसिक हालत थी, मेरी सेहत थी। और कुरआन वो रस्सी थी। मैंने उसी रस्सी को पकड़ने का फैसला किया, भाई। और मुझे अल्लाह का शुक्रिया अदा करने में 45 मिनट, लगभग एक घंटा लगा। मैं उसका शुक्रिया अदा करना चाहता था। मैं उसका बहुत शुक्रिया करना चाहता था, समझ रहे हैं? मुझे 45 मिनट लग गए। आँसू रुक नहीं रहे थे, आप जानते हो, जब आप किसी से मोहब्बत करते हो। और आप उनके मदद के लिए इतने संतुष्ट और इतने शुक्रगुज़ार होते हैं?
हम तो दुनिया की बात कर रहे हैं, जहाँ आप उनके लिए रो पड़ते हैं, समझ रहे हैं?
“बहुत शुक्रिया, आपने मुझे बाहर निकाला।” ये तो ख़ालिक़ हैं। मैंने उसकी मौजूदगी महसूस की। उसी पल मेरा अल्लाह से रिश्ता पक्का हो गया, पूरा हो गया। मैंने यही दुआ की। मैंने उसका शुक्रिया किया। मैंने कहा, “शुक्रिया, अल्लाह।” मैंने अल्लाह से कहा, मैंने हाथ उठाए और कहा, “या रब्बी, या अल्लाह, मेरी हर गलती माफ कर दे।” मैंने उससे विनती की। मैंने कहा, “कृपया, अल्लाह।” और मैं यहाँ हूँ। मैं 15 साल से मुसलमान हूँ। मैं बिल्कुल परफ़ेक्ट नहीं हूँ। मैं आलिम नहीं हूँ, न शेख हूँ, न ही ऐसा दावा करता हूँ। मेरा इल्म बहुत कम है। मैं अल्लाह से मोहब्बत करता हूँ। मैं रसूलुल्लाह से मोहब्बत करता हूँ मैं दीन से मोहब्बत करता हूँ, सहाबा(companions) से मोहब्बत है, उमर इब्न ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अन्हु) जैसे। यही वो लोग हैं जिनकी हमें पैरवी करनी चाहिए। अफ़सोस की बात है कि हमारा नौजवान आज इस दुनिया में बिल्कुल खोता जा रहा है। तो यही मेरा सफ़र था। यही मेरा टर्निंग पॉइंट था। आपकी कुछ पोस्ट्स में हमने आपकी माँ को देखा है वो भी इस्लाम में दाख़िल हुई हैं। तो आपकी कहानी की शुरुआत से लेकर अंत तक उनकी क्या स्थिति रही?
अरे, आप खुद को रोक नहीं पाते, है ना?
ये मेरे लिए बहुत संवेदनशील बात है, लेकिन मैं पूरी कोशिश करूँगा, इंशाअल्लाह। मेरी माँ, मैं इसे जितना जल्दी हो सके, कह देता हूँ। मैं उनकी तस्वीर भी नहीं देख पाता। मैं उन्हें बहुत याद करता हूँ, लेकिन अल्लाह उन्हें जन्नतूल फिरदौस अता करे। आमीन। मेरी माँ और मैं बस सबसे अच्छे दोस्त थे। जब मुझे डिपोर्ट किया जा रहा था डिपोर्ट होने से ठीक पहले, मेरे पास उस हालत में 28 दिन बचे थे। लेकिन जब मुझे डिपोर्ट किया जा रहा था, मैं अस्पताल गया, डॉक्टरों के पास। अस्पताल और उन्हें स्टेज-4 कैंसर का पता चला, तो फिर जोवो spots थे वो बड़े होने लगे और आखिरकार वो फैलने भी लगे। तो मेरी माँ के मामले में, मैंने डॉक्टर से कहा, “उनसे उनके कैंसर के बारे में कुछ मत कहना।” और फिर वो मलेशिया आईं। मैं उन्हें अक्टूबर में मलेशिया लेकर आया। तो जब वो वहाँ आईं, मैंने सोचा, वाह। मैं बहुत भावुक हो गया। मेरी माँ यहाँ हैं। ठीक है, मैंने बाइबल ली। “माँ, बाइबल में लिखा है, यीशु कहते हैं, ‘मेरी इबादत मत करो।’” उन्होंने कहा, ‘मेरी इबादत मत करो। मैं तुम्हारा प्रभु नहीं हूँ, माँ।’” मैंने कहा, “क्या मुस्लिम उनकी इबादत करते हैं?” उन्होंने कहा, “नहीं।” “तो फिर आप क्यों करती हैं?” और मैं ये बात हर दिन कहता था। हर, हर दिन मैं कहता, “यीशु मसीह ने कहा है, शराब मत पीओ। सूअर का मांस मत खाओ।” “यीशु कैसे नमाज पढ़ते थे, माँ?” सब बाइबल से। इसका कुरआन से कोई लेना-देना नहीं, ठीक है?
रोजाना यही होता था। और हर दिन, हर दिन “माँ, मैं आपसे मोहब्बत करता हूँ।” “माँ, जज़ाकल्लाहु ख़ैरन।” और फिर आखिर में एक वक़्त ऐसा आया जब मैंने कहा, “माँ, क्या आपको लगता है यीशु मसीह?” “नहीं। देखो बेटा, यीशु मसीह ख़ुदा नहीं थे।” बूम। मेरा दिल। माफ करना, मैं अब भावुक हो रहा हूँ। और उन्होंने शाहादा पढ़ लिया। आप यक़ीन नहीं करोगे। उन्होंने कहा, “अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाह वा अशहदु अन्ना मुहम्मद रसूलुल्लाह।” बिना किसी गलती के। मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ। मैं उन्हें रिकॉर्ड कर रहा था। मैं रो रहा था और उन्हें रिकॉर्ड कर रहा था। देखिए, अल्लाह उन्हें कितना चाहता था। इस हद तक कि वो मुसलमान बन गईं, और अल्लाह ने उन्हें उनकी मौत पर पूरा करम अता किया। वो नींद में बहुत सुकून से तहज्जुद के वक़्त इस दुनिया से चली गईं, फज्र से ठीक पहले, जुमे के दिन, रमज़ान में, रमज़ान के आख़िरी 10 दिनों में। उनकी जनाजज़ेकी नमाज़ जुमे के दिन एक बिल्कुल नई मस्जिद में पढ़ी गई, और उन्हें एक बिल्कुल नई क़ब्र में दफ़नाया गया। अगर भाई विंस ने इस्लाम क़बूल न किया होता, तो आज वो क्या कर रहे होते?
अगर मैं ईमानदारी से कहूँ, तो या तो मैं कब्र में मरा पड़ा होता, किसी ने मेरी हत्या कर दी होती, या 30 साल से ज़्यादा की जेल काट रहा होता, या उम्र क़ैद, क्योंकि उस ज़िंदगी में या तो मैं उसे मार देता या किसी और को। लेकिन अल्लाहु अकबर, अल्लाह ने मुझे इस्लाम के लिए चुन लिया, भाई। वल्लाही, उसने मुझे अँधेरों से निकालकर रौशनी में ला दिया, और मुझे समझ, इल्म और हिकमत दी। अह, कैसी ज़िंदगी है। मुसलमान की ज़िंदगी कितनी खूबसूरत होती है। वल्लाही, वल्लाही। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की किस बात ने आपको सबसे ज़्यादा प्रभावित किया?
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की हर चीज़ हर मायने में, हर पहलू में, सबसे ऊँचे और सबसे खूबसूरत तरीके से बेहद शानदार और लाजवाब है। इस धरती पर कोई ऐसा इंसान, कोई ऐसी मख़लूक कभी नहीं बनाई गई, जो उनसे ज़्यादा मुकम्मल, खूबसूरत, रहमदिल और मोहब्बत करने वाली हो। एक सच्चा, अच्छा इंसान बनने के लिए, वो ही असली मिसाल हैं, असली रोल मॉडल। क्या हम उनके जैसे बन सकते हैं? नामुमकिन। लेकिन एक बात थी जो बाकी सब में सबसे ज़्यादा अलग थी। मैं उनकी सीरत पढ़ रहा था, चाँद के दो टुकड़े होने वाली घटना। और मैं पढ़ता गया और वाह। बस उनकी उम्र से लेकर हर चीज़ मतलब, ऐसी कोई भी बात नहीं है जो हमें गहराई से इतने भारी अंदाज में न छू जाए, समझ रहे हैं न?
लेकिन एक बात थी जिसने मुझे इतना रुला दिया, जब वो अपनी मौत के बिस्तर पर थे। सोचिए, आप मरने वाले हों। बेहोशी में आते-जाते हुए, कैसा महसूस होता होगा, सोचिए। उन्होंने अपने सहाबा से कहा, “मुझे मेरी लोगों के पास ले चलो। मैं उनसे बात करना चाहता हूँ।” और उन्होंने उनसे कहा, “नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम), आप नहीं जा सकते। आपकी तबीयत ठीक नहीं है, हालात ऐसे नहीं हैं।” मतलब, उन्होंने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की। लेकिन उन्होंने जाने की ज़िद की। और मुझे याद है, जब मैं ये पढ़ रहा था, लिखा था कि सहाबा उन्हें दोनों बाजुओं से सहारा देकर लिए जा रहे थे, और उनके पैर ज़मीन पर घिसट रहे थे वो चल भी नहीं पा रहे थे। देखो, अपनी उम्मत के लिए उनके दिल में कितनी मोहब्बत थी। मुझे तो उल्टी-सी लगती है तो मैं बिस्तर से भी नहीं उठ पाता। आप जानते हो वो कितना बुरा एहसास होता है?
यह शख़्स, यह खूबसूरत नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यह अल्लाह की मख़लूक़ चाहे वो जैसा भी महसूस कर रहे थे, वो अपने लोगों से आख़िरी दफ़ा बात करना चाहते थे। तो जब मैंने पढ़ा कि उनके पैर घिसट रहे थे, सोचो, उन्हें इसी हालत में लोगों के सामने लाया गया, मैं ज़ोर-ज़ोर से रो पड़ा। उन्होंने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए वो सब कुर्बान किया जिसे आप सोच भी नहीं सकते सहाबा ने अल्लाह के लिए और इस उम्मत के लिए ऐसी-ऐसी बातें कुर्बान कीं जो आप कल्पना भी नहीं कर सकते, तो हमें उनका शुक्रगुजार होने के लिए क्या करना चाहिए, आप जानते हैं?
तो वही हिस्सा था, सब कुछ मुझे छू गया, लेकिन उस हिस्से ने मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया। जब नबी मुहम्मद( सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) वो पहले शख्स थे जिन्होंने “अस्सलामु अलैकुम” कहा था। (आप पर सलामती हो)। और आप उनकी दाढ़ के पीछे का हिस्सा भी देख सकते थे। लेकिन जब वो अल्लाह की राह में मैदान में लड़ रहे होते थे, तो वो बिल्कुल शेर जैसे थे, एक सच्चे मुजाहिद, समझ रहे हैं? खालिद बिन वलीद (रज़ि अल्लाहु अन्हु), हमज़ा—इस्लाम के शेर। फिर अली (रज़ि अल्लाहु अन्हु), हुसैन, हसन, अबू उबैदा, उमर बिन ख़त्ताब, उस्मान, अबू बक्र, सबको देखो। come on! क्या हम सच में हॉलीवुड और म्यूज़िक इंडस्ट्री को फ़ॉलो कर रहे हैं? “ये ही असली लोग हैं…
खुदा।” और बहुत से नौजवान हैं जो उस लाइफ़स्टाइल को देख कर बड़े होते हैं, जो लाइफ़स्टाइल पहले आपकी थी। आप उन लोगों से क्या कहना चाहेंगे जो इस दुनिया में ही खुशियाँ तलाश करते रहते हैं?
इंद्रधनुष के आख़िर में कोई सोने का घड़ा नहीं होता। और सुरंग के आख़िर में कोई रोशनी भी नहीं होती। ये सब सिर्फ़ एक भ्रम है। और मैं आपको कुरआन से एक ऐसी बात बताने वाला हूँ जो सुनकर हैरानी होगी। ये मज़ाक नहीं है। उस लाइफ़स्टाइल में वफ़ादारी नाम की कोई चीज़ नहीं होती। वफ़ादारी उसी की होती है जो सबसे ज़्यादा पैसा बना कर दे। और अगर आप पैसे बनाने में अच्छे नहीं हो, तो आप बोझ समझे जाते हो लेकिन मैं कुरआन से ये बात कहना चाहता हूँ यह बात हर किसी के लिए चीज़ों को साफ़ कर देगी। अगर आपके पास थोड़ी-सी समझ, थोड़ी-सी अक़्ल है, थोड़ी-सी शराफ़त और खुला दिमाग़ है, तो यह आयत उन सभी गुनहगारों के लिए है। यह आयत वहाँ बाहर मौजूद हर अरबपति के लिए है। यह आयत हर राजा के लिए है, और उन सबके लिए जो ज़ुल्म झेल रहे हैं, और उनके लिए भी जो पैसे कमाना चाहते हैं चाहे उस लाइफ़स्टाइल में हों या नहीं पर जो इस राह में जाना चाहते हैं मैं आपको यह आयत बताता हूँ। अल्लाह कुरआन में फ़रमाता है, और ये बात सीधे उन्हीं लोगों को संबोधित है। “अगर तुम कयामत के दिन दुनिया की सारी दौलत लेकर भी मेरे पास आओ। अब सोचिए, अल्लाह कह रहा है, दुनिया की सारी दौलत लेकर भी अगर तुम क़यामत के दिन मेरे पास आओ और उसे फिरौती की तरह पेश करो, “कृपया अल्लाह, मुझे जन्नत दे दो या मुझे दोबारा मौका दे दो।” अल्लाह कहता है, “इसका कोई फ़ायदा नहीं। आज हिसाब-किताब का दिन है।” तुम्हारा सब कुछ खत्म। तो हम किसके पीछे भाग रहे हैं?
तुम किस पैसे के पीछे भाग रहे हो? आपको कितने मिलियन चाहिए? आपको कितने बिलियन चाहिए? कौन-सी फ़रारी चलाना चाहते हो? तो भाई, अभी आप कौन-से प्रोजेक्ट कर रहे हैं? मेरी NGO का नाम “सहाबा” है, जिसका मतलब है नबी ﷺ के साथियों का समूह। ‘99’ अल्लाह के 99 नामों और उनकी गुणों को दर्शाता है। और हमारी टी-शर्ट के पीछे वह हदीस लिखी है जिसका मैंने आपको पहले जिक्र किया था, कि तुम में सबसे बेहतरीन वो हैं जो इंसानियत को सबसे ज़्यादा फ़ायदा पहुँचाते हैं। तो हम कोशिश करते हैं कि वे किकबॉक्सिंग, मुए थाई बॉक्सिंग करें, और सेल्फ-डिफ़ेन्स सीखें। हम चैरिटी भी करते हैं वगैरह- वग़ैरह!
हम हर तरह से मुस्लिम कम्युनिटी के लिए खड़े होते हैं, दीन ही उनके लिए सब कुछ है। हमारे लिए भी। फ़िलिस्तीन के लिए हम काम करते हैं, मतलब, वहाँ तक फ़ूड ट्रक पहुँचाते हैं। बस यही सब काम हम करते हैं। जो लोग स्पेगेटी पास्ता पर केचप डालते हैं, आप उनके साथ क्या करना चाहेंगे? खैर, मैं उन लोगों के साथ वही करना चाहूँगा जो केचप स्पेगेटी बोलोग्नीज़ पास्ता की प्लेट पर डालते हैं, उन्हें उम्रभर के लिए गिरफ्तार कर लो और चाबी फेंक दो। उन्हें गिरफ़्तार करो। शायद उनका चेहरा ही केचप में डुबो देना चाहिए? नहीं, नहीं, नहीं,उन्हें ज़िंदगी भर के लिए जेल में डाल दो। क्या ये जुर्म है? हाँ, पूरा जुर्म है । पिज़्ज़ा पर पाइनऐप्पल तो मत डालो, कम से कम इटली में तो नहीं। और इटली में अपनी सॉस पर केचप भी मत डालना, ठीक है?
मेरा मानना है कि उन्हें किसी संस्थान में बंद कर देना चाहिए। शायद जेल भी नहीं, बल्कि किसी मानसिक संस्थान में यह समझने के लिए कि आखिर उनके साथ दिक्कत क्या है। भला कोई स्पेगेटी की प्लेट पर टोमैटो सॉस कैसे डाल सकता है?
जहाँ शेफ ने लहसुन को बारीक काटा है, ऑलिव ऑयल पैन में डाला है, उसे टमाटर पेस्ट के साथ कारमेलाइज़ होने तक सिज़ल किया है ताकि उसकी खटास निकल जाए ताकि आपको जलन न हो, फिर उसमें बेसिल डालता है, फिर सॉस, फिर नमक, और बाकी सारी सामग्री। और फिर पूरा 20 मिनट का ये तरीका करता है। और उस 20 मिनट के बाद, वह उसे और 30 मिनट पकाता है। और उस सॉस का सही स्वाद लाने के लिए और वह बीच-बीच में चखकर उसका फ्लेवर ठीक करता है, इतनी मेहनत करता है, और आप आते हो एक टमाटर पेस्ट लेकर जिसमें चीनी मिली होती है, और उसे स्पेगेटी के ऊपर डाल देते हो। ज़िंदगी भर की जेल। बस यही। और जो पिज़्ज़ा पर पाइनऐप्पल डालते हैं, उन्हें किसी खेत में कम से कम 15 साल के लिए पत्थर तोड़ने भेज देना चाहिए। पिज़्ज़ा पर फल? या अल्लाह!
क्या आप इटालियन में कुछ कहना चाहेंगे क्योंकि आपकी इटालियन पृष्ठभूमि है, मेरी इटालियन इतनी अच्छी नहीं है, लेकिन मैं अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करता हूँ। समझ रहे हैं ना? सबसे पहले, मैं सलाम कहना चाहता हूँ, कावी दी तिरिनी, सालेरनो, अपने परिवार को। फोकारेली, सवास्टानी। Many kisses to all of you. आप सबको बहुत सारे प्यार और दुआएँ। और जो इटालियन इटली में हैं, उनके लिए जिनके पास… दिमाग में समझ-बूझ है, रोमन कैथोलिक धर्म को भूल जाइए, इस ईसाइयत को भी छोड़ दीजिए। पूरे सम्मान के साथ कह रहा हूँ, एक कुरआन उठाइए, उसे पढ़िए। और मुसलमानों की ज़िंदगी के करीब आइए। और आप देखेंगे कि आपकी ज़िंदगी हमेशा सुकून में रहेगी। मेरे सारे परिवार वाले, मेरे सारे दोस्त जो इटली में हैं, मुस्लिम बन जाइए। तकबीर! अल्लाहु अकबर!