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क्या इस्लाम ‘ग़ैर-मुसलमानों को मार दो’ कहता है? — जिहाद, शरीअत और ग़ुलामी के बारें में छुपी सच्चाई

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अगर इस्लाम इंसानों को महत्व देता है, तो फिर इसमें ग़ुलामी का concept क्यों है? पैगम्बर मुहम्मद (स.अ.व) के जीवन में युद्ध हुए हैं, और इस्लाम में concept भी है जिसे "जिहाद" कहते हैं । आप उस व्यक्ति से क्या कहेंगे जो कहता है, "क्या ये क्रूर और हिंसक नहीं दिखते?" अगर इस्लाम मुसलमानों को ग़ैर-मुसलमानों की हत्या करने के लिए प्रेरित करता है सिर्फ इसलिए कि वो गैर-मुसलमान हैं, तो जब मुसलमान भारत पर लगभग एक हज़ार साल से राज कर रहे थे? तो वो वहाँ हर एक हिंदू को खत्म कर सकते थे, है ना?

शरीअत का मतलब है क़ानून। तो इस्लामी शरीअत है, फ्रेंच शरीअत है, ऐंग्लो-सेक्सन शरीअत है। ये सारी शरीअतें अच्छी हैं, ठीक है। लेकिन इस्लामी शरीअत और इन सभी प्रकारों के क़ानून के बीच केवल एक अंतर है, और वो यह है कि ये बिल्कुल perfect है। अब्राहम लिंकन, एक बहादुर व्यक्ति थे , जिन्होंने एक bill पर हस्ताक्षर किए जिससे एक ही दिन में 40 लाख गुलामों को आज़ादी मिल गई। जिसका रिजल्ट था सिवल वॉर जिसमे आधे मिलियन लोग मारे गए और उतने ही विकलांग हो गए। इस्लाम ने मुसलमानों के दिलों में आज़ादी की मोहब्बत को पैदा किया। लेकिन इस्लाम ने इसे किया केसे ?

Christianity प्यार और शांति के बारे में है, और मैथ्यू 5:39 में, आपसे कहते हैं कि जो आपको थप्पड़ मारे, उसके सामने दूसरा गाल कर दें। दूसरी तरफ इस्लाम एक ऐसी शरीअत है जिसमें सख्त सजाएं होती हैं। एक ईसाई जो कहता है "ईश्वर प्रेम है", उसे अपनी आस्था बदलकर इस्लाम को क्यों अपनाए? कभी-कभी मैं यह उदाहरण देता हूँ, ठीक है?

मैं मार्शफील्ड, विस्कॉन्सिन गया था। वहाँ एक मस्जिद ओपन हाउस था। और एक महिला ने मुझसे ठीक यही सवाल किया। "ठीक है, डॉक्टर सबील, आपने कहा कि इस्लाम खूबसूरत है। आपकी शरीअत की सजाएं इतनी कठोर कैसे होती हैं?" मैंने उसे यह उदाहरण दिया। इस देश में हर साल बलात्कार के 93,000 मामले दर्ज होते हैं। वैसे ये सिर्फ रिपोर्ट किए गए मामले हैं। अगर ऐसा है, तो वो औसतन सिर्फ 5 से 7 साल तक जेल में एक कैदी के रूप में रहेंगे। और फिर वे बाहर आएंगे, तो समाज खतरे में पड़ जाएगा। उसे डर होगा कि वह कभी भी आकर मुझ पर हमला कर सकता है। समाज के प्रति न्याय कहां है, समाज की शांति और उस औरत की सुरक्षा कहां है? जब यह कैदी वहाँ है, जब वो बलात्कारी जेल में है, तो उसे कौन खिलाएगा? तो उसे कौन ठहरायेगा?

कौन उसे जेल की सारी सुख-सुविधाएँ प्रदान करेगा, है ना? न्यू यॉर्क राज्य में, प्रत्येक कैदी पर प्रति वर्ष लगभग 90,000 taxpaying dollars खर्च होते हैं। 90,000। मेरा tax money। लोगों का tax money। सही?

इस्लाम कहता है कि उचित दंड दिया जाना चाहिए। यदि वो दंड सार्वजनिक रूप से दिया जाए, तो बाकी समाज देख रहा होगा कि इस व्यक्ति को दंड दिया जा रहा है। और फिर एक संभावित बलात्कारी, अपराधी या चोर, अगर उसके मन में बलात्कार, हत्या या किसी और जुर्म का ख्याल होगा, तो वह सोचेगा कि अगर मैंने कुछ किया, तो मेरी हालत ऐसी ही होने वाली है। इसलिए इस्लाम में सज़ा एक deterrent (डराने के लिए) के रूप में होता है। ये असरदार होते हैं। अगर आप तुलना करें, तो किसी भी इस्लामी या मुस्लिम देश में, मैं कहूंगा कि वहां बलात्कार की घटनाएं बहुत कम होती हैं। हत्या, नशे की लत और हमलों की घटनाए भी बहुत कम होती हैं उन देशों की तुलना में जहां ऐसे deterrents नहीं होते। पहला। दूसरा ये होगा। मान लीजिए अगर सुबह के 2 बजे एक चोर आता है और दरवाज़ा खटखटाता है, फिर दरवाजा तोड़ता है, तो आप उसे यह नहीं कहेंगे, "दूसरा गाल भी लें। स्वागत है। आप यह एक कमरा ले लें।" "आप इस एक कमरे में हैं। मैं आपको दूसरा कमरा भी दिखाऊंगा, जो मेरे पास है।" ये है दूसरा गाल आगे करना । यह practical नहीं है। दुनिया इस तरह से नहीं चलती। कल्पना कीजिए यदि आप दूसरा गाल आगे कर देते हैं। पूरी दुनिया चोरों, लुटेरों, बलात्कारियों और हमलावरों से भर जाएगी। यह practical नहीं है। कोई भी ऐसा नहीं करता, है ना?

मेरा मतलब है, हमारा देश, आपका देश नहीं, यह देश। इसके रक्षा के लिए 800 बिलियन डॉलर का एक बजट है। कल्पना कीजिए यदि अमेरिका दूसरा गाल आगे कर दे,चीन और रूस हर जगह आगे होंगे। वे पूरे अमेरिका पर होंगे, मुझ पर विश्वास कीजिए, है न? फिर ये अमेरिका नहीं रहेगा। किसी भी परिवार किसी या किसी भी आदमी को दूसरा गाल आगे करने की प्रथा नहीं अपनानी चाहिये। है ना ?

यह practical नहीं है। यह अराजकता पैदा करेगा। सभी अच्छे लोग ख़त्म हो जाएंगे। शरीअत का मतलब है क़ानून। तो इस्लामी शरीअत है, फ्रेंच शरीअत है, ऐंग्लो-सेक्सन शरीअत है। ये सारी शरीअतें अच्छी हैं, ठीक हैं। वो लोगों को उनके अधिकार देना चाहते हैं। लेकिन इस्लामी शरीअत और इन सभी प्रकार के कानूनों के बीच केवल एक अंतर है, और वो ये है कि यह perfect है। यह flawless है। क्यों?

क्योंकि प्रत्येक प्रणाली अपने संस्थापक के गुणों को अपनाती है। वो शरीअत जो एक इंसान द्वारा बनाई गई है, अच्छी हो सकती है क्योंकि वो सुंदर है। लेकिन शरीयत जो अल्लाह की है। जो अल्लाह ने दी है। वो परफेक्ट है। इसमें ना तो कोई खामी है,और ना गलती । कभी लोग सोचते हैं कि वो अल्लाह से ज़्यादा समझदार हैं। वे अपने खुद के क़ानून और नियम बनाएंगे वो ऐसा करते हैं, और असफल हो जाते हैं। तो अल्लाह ने जो कहा है, उससे बेहतर कुछ भी नहीं है। और यह मेरी अपनी सोच है, आप जानते हैं क्या ? अगर मैं गैर-मुस्लिम होता तो इस्लाम के बारें में जो कुछ भी मैंने पढ़ा है, वो सब पढ़ता, ऐसी कई बातें हैं जो मुझे इस्लाम की ओर आकर्षित करती थीं। उनमें से एक है शरीयत। यह है एक miracle इसे कुरान का "legislative miracle" कहते हैं । क्यों?

क्योंकि उस समय, दुनिया की विभिन्न समाज कुछ अच्छा क़ानून बनाने की कोशिश कर रहे थे और ऐसे था, जैसे, Romans कुछ अच्छा क़ानून बना रहे थे। और साथ ही साथ Greeks कोशिश कर रहे थे। लेकिन अगर आप आज देखें कि वे क्या कानून बना रहे थे, तो आप हँसेंगे। लेकिन यह अब भी जारी है और हर समय और युग के लिए बिल्कुल perfect है। दरअसल, ये सख़्त सजाएँ इस उद्देश्य से नहीं हैं कि जितना संभव हो, ज्यादा लोगों पर लागू किया जाए। उदाहरण के लिए, मैं एक ऐसे देश में रहता हूँ जहाँ traffic laws driving laws बहुत कड़े हैं और इसी वजह से आप देखते हैं कि लोग नियमों के मुताबिक़ गाड़ी चलाते हैं। आप ज़्यादा दुर्घटनाएँ नहीं देखते। और यह वास्तव में लोगों की सुरक्षा के लिए है। अगर आप अपराधी के दृष्टिकोण से देखेंगे, तो यह कड़ा है, लेकिन पीड़ित के दृष्टिकोण से यह सारे कानून और भी कड़े होने चाहिए। क्योंकि जिस का घर टूटा और उसका पैसा चोरी हुआ, उसके लिए, यह बहुत महत्वपूर्ण था। और वो ये सब कुछ सालों से बचा रहा था। तो जब कोई लापरवाही से घर में घुसता है, पैसे को चुराकर drugs खरीदता है, तो चोर के दृष्टिकोण से जो लोग इसे सख्त से सख्त मानते हैं, वे चोर के प्रति सहानुभूति व्यक्त कर रहे होते हैं, न कि किसी पीड़ित के प्रति। वो कहते हैं, "आप लोग adultery करने वालों को सजा क्यों देते हैं, ठीक है?

और आप उन्हें मौत की सज़ा देते हैं, है न? तो आप जानते हैं, ऐसा क्यों है... West में, वे कहते हैं कि यह बर्बरता है। लेकिन क्या आपको पता है Adultery से कितना बड़ा फितना फैलता है? देखिए, इस्लाम में adultery के खिलाफ क़ानून हैं, जिसे साबित करना बहुत मुश्किल है। आपको चार गवाहों की ज़रूरत होती है, और उन्हें वास्तविक घटना का गवाह बनना होता है... सिर्फ़ एक-दूसरे के बगल में बैठे दो लोग नहीं। उन्हें हर चीज़ का गवाह बनना होगा। यह बहुत मुश्किल है। यह आपको डराने के लिए होता है। लेकिन देखिए, यह सज़ा कितनी डरावनी है। क्यों?

क्योंकि यह आपको adultery से दूर रखने की कोशिश करता है। जब आप अमेरिकी संस्कृति को देखते हैं, एक survey है जो शिकागो ट्रिब्यून द्वारा प्रकाशित हुआ था। इस देश में एक सामान्य पुरुष, उनके पास कम से कम सात extra girlfriends होती हैं या extramarital affairs या premarital affairs। अगर कोई पुरुष बिना शादी के किसी महिला से संबंध बनाए और अब उसका एक बच्चा हो, तो वह उसे छोड़ भी सकता है। बस कुछ न्यूनतम भुगतान करके। लेकिन बच्चा अब बिना पिता के रह जाता है। Single parent homes। यह समाधान नहीं है। और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, आंकड़े यह हैं कि जो बच्चा सिंगल पैरेंट के घर में पैदा होता है या फिर एक ही पैरेंट द्वारा पाला जाता है, statistically, मैं कह रहा हूँ, सभी बच्चों के लिये नहीं, परंतु सामान्यत: उनका आईक्यू कम होगा। उनका immune system दो पैरेंट वाले परिवार के मुक़ाबले बहुत कमजोर होगा। ऐसे बच्चों के स्कूल छोड़ने की संभावना ज़्यादा होती है। उनके बेरोज़गार होने की संभावना अधिक होगी। ऐसे बच्चों के नशे और गैंग में शामिल होने की संभावना भी ज़्यादा होती है, और यह vicious cycle जारी रहता है। यह पश्चिमी देशों में इतना बड़ा बोझ बन गया कि उन्हें एक क़ानून लाना पड़ा जिसमें कहा गया, हम उन पुरुषों को मजबूर करेंगे, जिन्होंने बिना विवाह के ये बच्चे पैदा किए है, उन्हें बच्चे के लिए धन प्रदान करना होगा। क्योंकि इसमें taxpayer money का बहुत सारा पैसा खर्च हो जाता है। यह नियंत्रण से बाहर हो रहा था, आजादी के कारण क्या यह हुआ था ?

क्या मतलब? सरकार ने इस बारे में कुछ कानून बनाए हों । क्या ऐसा हुआ था ? ओह, हाँ। अब हर Western country में। अगर एक आदमी महिला के साथ सोता है, महिला गर्भवती होती है, और महिला बच्चे को रखती है, बच्चे को नहीं मारती, तो फिर आदमी को बच्चे की देखभाल के लिए पैसे देने होते हैं। भले ही वो शादीशुदा ना हों। हाँ यहाँ तक कि अगर वे शादीशुदा नहीं हैं क्योंकि यह नियंत्रण से बाहर हो गया था। ठीक है, और इन गरीब बच्चों के बारे में क्या? उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। ओह, लेकिन इसके परिणाम हैं। आप बिना परिणामों के चीजें नहीं कर सकते, है ना?

और देखा जाए तो इससे कुछ समस्याएँ पैदा हुईं क्योंकि तब कुछ पुरुष सोच रहे थे, "ठीक है, मुझे यकीन है कि वह बच्चा, वो मेरा बच्चा नहीं है।" कुछ मामलों में, वो महिला ने अन्य पुरुषों के साथ सोई थी। मुझे कैसे पता चलेगा कि वो मेरा बच्चा है? तो आप जानते हैं, इससे बाहर निकलने का एकमात्र तरीका है कि आप एक genetic test करवाएं, और फिर आप कह सकते हैं, ठीक है, ठीक है, अगर टेस्ट से पता चलता है कि ये बच्चा आपका नहीं है, तो आप उस ज़िम्मेदारी से मुक्त हैं। लेकिन, कई बार महिला ही नहीं जानती कि बच्चे का पिता कौन है?

तो वे सोचती है कि शायद यह मेरा current boyfriend है, लेकिन उसके पास कोई और था, या मेरा पति ही वो हैं, लेकिन उसके पास एक और boyfriend था। शायद एक रात वे एक पब या क्लब में मिले हो। वो बाहर गए, उन्होंने शराब पी। और उसे कुछ याद ही नहीं की वो कौन था। यह इतना crazy हो गया, नियंत्रण से बाहर हो गया कि अब फ्रांस में, उन्होंने genetic tests पर प्रतिबंध ही लगा दिया है। क्योंकि कई बार यह सामने आया कि वह आदमी जिसे महिला ने कहा, "यह वही है जो बच्चे का पिता है," वह असल में बच्चे का पिता ही नहीं था। तो यह वो परिणाम हैं जो अब West में होते हुए देखे जा रहे हैं। और लोग, क्योंकि उन्हें यह बताया जाता है कि अगर आप कपड़े नहीं पहनते, आप खुले कपड़े नहीं दिखाते या ऐसे कपड़े जो यह दिखाता हैं कि आप कितने अमीर, शक्तिशाली या कुछ भी हैं, आपको attention मिलने वाली नहीं है। attention अच्छा है। आप पैसे कमा सकते हैं। आप attention पाकर अधिक सम्मान प्राप्त करते हैं। इसीलिए सबलोग attention चाहते हैं। इसीलिए वो सबसे अधिक attention प्राप्त करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगे। और हर दिन आप adultery के, अपने साथी को धोखा देने के विज्ञापन देख रहे हैं, और फिर वो हैरान हैं कि क्यों adultery की दर या धोखा देने की दर इतनी अधिक है। West में तलाक की दर अब 50% है। इसलिए 2 में से 1 शादी अब असफल होने वाली है। और अब वो हैरान हैं कि ऐसा क्यों?

लोग अपने जीवनसाथी पर विश्वास नहीं कर सकते। वो एक-दूसरे पर भरोसा ही नहीं कर सकते। वो हमेशा चिंतित रहते हैं। उन्हें चिंता लगी रहती है। या शायद मेरा पति धोखा दे रहा है। या शायद मेरी पत्नी मुझे धोखा दे रही है। तो यह है West। यही वो तथाकथित खुशी है जो आज़ादी लेकर आई है। हर कोई डरा हुआ है। चिंतित और असुरक्षित। पैगंबर मुहम्मद (स॰अ॰व॰) के जीवन में युद्ध हुए हैं। पैगंबर मुहम्मद (स॰) के जीवन में युद्ध हुए हैं। और इस्लाम में एक concept भी है जिसे कहते हैं "जिहाद"। तो जब लोग, जब वो इस बारे में बात करते हैं, उस युद्ध के बारे में जो पैगंबर (स॰अ॰व॰) ने की, युद्धों की संख्या, Old Testament में लगभग हर पैगंबर ने लड़ाई लड़ी। मूसा ने लड़ाई लड़ी, है ना?

दाऊद और सुलैमान, मैं सारे पैगंबरों के नाम ले सकता हूँ जिन्होंने युद्ध लड़ा। सिर्फ इसलिए कि एक व्यक्ति किसी युद्ध में शामिल है इससे उस व्यक्ति को नबूवत से बाहर नहीं कर दिया जाता। इसलिए एक पैगंबर होने का criteria यह नहीं है कि पैगंबर को किसी भी युद्ध में भाग नहीं लेना चाहिए। युद्ध कभी-कभी, यह शांति बनाए रखने और रक्षा के लिए आवश्यक हो जाता है। जब पैगंबर मक्का से मदीना चले गए, तो उन्होंने इस्लामी राज्य की नींव रखी। मुश्रिकों, मूर्तिपूजकों, मक्का के अविश्वासियों ने, alliances के साथ, वे लगातार वे लगातार पैगंबर (स॰अ॰व॰) पर हमला करते रहे, है ना?

लेकिन सबसे बड़ी बात यह है। दुनिया भर के कई संविधान की तुलना में, इस्लाम ने ethical guidelines दिए, wonderful guidelines, बस gudelines भले ही आप किसी युद्ध में शामिल हों, ये वो guidelines हैं जिनको आपको follow करना है । क़ुरआन सूरह नंबर 2, आयत नंबर 190 में अल्लाह कहता है, इसका अनुवाद है: तो यदि कोई आप पर युद्ध थोपता है, तो आपको पलटकर लड़ने का हक़ है। लेकिन उस युद्ध में, अल्लाह कह रहा है कि आपको कुछ guidelines का पालन करना चाहिए। हद से आगे मत बढ़ो। तो, संक्षेप में, वे guidelines क्या हैं?

क़ुरान में, अध्याय 5, आयत 32 में कहा गया है कि तो एक युद्ध में भी, आप महिलाओं और बच्चों, या जो युद्ध में शामिल नहीं है उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकते, यह पहला guideline है । इस्लाम में कोई carpet bombing नहीं है। इस्लाम में हिरोशिमा या नागासाकी नहीं है। इस्लाम में बिना सोचे-समझे किसी को मारने की इजाज़त ही नहीं है। जैसा कि कुछ देश कर रहे हैं, इससे बिल्कुल उलट। और हम नागरिकों के संसाधनों को नष्ट नहीं कर सकते। फसलें या पशु संसाधन, विद्युत संसाधन, इंटरनेट संसाधन। और आखिरकार, अगर दुश्मन कहे, "चलो शांति समझौता करते हैं ," अगर वो हथियार छोड़ रहे हैं , अगर वो शांति की ओर बढ़ें, क़ुरआन में अध्याय 8, आयत 61 में कहा गया है, अन्य युद्धों के मुकाबले, और मैं आपको एक उदाहरण दे सकता हूँ। चलिये, द्वितीय विश्व युद्ध को लेते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध में, मृतकों की संख्या, वो लगभग 60 मिलियन थी। क्योंकि ज़्यादातर लोग जो मारे गए, वो नागरिक थे। इस्लाम इसे टालता है ethical guidelines से , बस Guidelines द्वारा तो इस तरह, अगर लोग इस्लाम के guidelines का पालन करें, तो आम नागरिकों की मौतें बहुत हद तक कम हो सकती हैं। और युद्ध कम हो जाएंगे क्योंकि युद्धों के लिए एक deterrence (प्रभावी निरोधक) होगा, उस अद्भुत तरीके से जिस तरह इस्लाम चाहता है कि हम जिएँ अपने पड़ोसियों के साथ शांति और सद्भाव और न्याय के साथ। तो, हम अनेक उदाहरण दे सकते हैं। अगर इस्लाम मुसलमानों को गैर-मुसलमानों को मारने के लिए प्रेरित करता है, सिर्फ इसलिए कि वो गैर-मुसलमान हैं, ऐसा कैसे हो सकता है जबकि मुसलमान भारत पर लगभग एक हज़ार साल से राज कर रहे थे?

तो वे वहाँ प्रतियेक हिंदू को खत्म कर सकते थे, है ना? अभी तो उनमें एक भी हिंदू नहीं होता। तो अब उन हिंदूओं के सभी वंशज हिंदू है, वो गवाही देते हैं कि मुस्लिम शासकों ने, उन्होंने वो लागू नहीं किया जिसका आरोप है कि गैर मुसलमानों को मारा जाना चाहिए। मुसलमानों ने 770 वर्षों तक स्पेन पर शासन किया। हर कैथोलिक और यहूदी मारे गए होते। उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि इस्लाम ऐसा नहीं कहता। मिस्र में अभी इतने सारे, 1.5 करोड़ कॉप्टिक ईसाई हैं? वो गवाही देते हैं कि इस्लाम इसे प्रोत्साहित नहीं करता। दरअसल, यह किसी को भी मारने की मनाही करता है जो आपके अधीन हो या आपके बीच रहता हो। सही?

और तुर्की, ईरान, इराक में भी। मैं एक नाई के पास गया और उसने कहा, "मैं इराक से एक ईसाई हूँ," और वह गवाही दे रहा था कि जब मुसलमान इराक पर शासन कर रहे थे, तो उन्होंने उसे नहीं मारा। खैर, यह आयत सूरह अल-हदीद में है। अल्लाह ने सूरह अल-हदीद में, शायद आयत संख्या पच्चीस में कहा है, "मैंने वास्तव में अपने पैगंबरों को चमत्कारों, किताबों और सही-गलत का ज्ञान देने वाले तराजू के साथ भेजा है. ताकि लोग न्याय स्थापित कर सकें। तो इस्लाम न्याय का धर्म है। और फिर अल्लाह जारी रखते हैं। क्योंकि अगर आप इसे देखें, किताबों के साथ नबी भेजना - ये शांतिपूर्ण माध्यम हैं ताकि लोग न्याय को स्थापित कर सकें। अगर न्याय स्थापित नही होता तो क्या होता?

और आयत में आगे लिखा है कि, "और फिर हमने लोहा उतारा, जिसमें लोगों के लिए महान शक्ति और लाभ है।" तो अगर न्याय शांतिपूर्ण तरीकों से स्थापित नहीं किया जा सकता, यह युद्ध के ज़रिए स्थापित किया जाएगा। तो समझे?

तो इस्लाम धर्म है न्याय का। शांति का और साथ ही युद्ध न्याय स्थापित करने के साधन हैं। "न्याय शांतिपूर्ण तरीकों से स्थापित करने की कोशिश करो।" युद्ध किसी राज्य के पास मौजूद कई उपायों में से एक है। तो जब लोग इस्लाम के बारे में सोचते हैं, तो वे उस सरकार को परखने के लिए अलग मापदंड इस्तेमाल करते हैं जो इस्लामी उसूलों पर चलती है — बाक़ी दुनिया की किसी भी सरकार की तुलना में। अब अगर आप किसी सरकार से कहें कि आपके पास सेना नहीं होनी चाहिए और आपको अंतिम उपाय के तौर पर, रक्षा के तौर पर, ऐसा नहीं करना चाहिए, आपको युद्ध का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए तो आप कहेंगे कि यह असंभव है। नहीं। इस्लाम ने गुलामी को खत्म किया, और West ने भी गुलामी को खत्म किया लेकिन अलग तरीके से। आइए देखें कि कौन सा तरीका सबसे अच्छा था या कौन सा बेहतर है। जिस तरीके से यह अमेरिका में किया गया, उदाहरण के लिए, वो prohibition द्वारा किया गया। लेकिन इस्लाम ने इसे खत्म किया inhibition से न की prohibition से। अब्राहम लिंकन, एक बहादुर व्यक्ति, उन्होंने एक bill पर हस्ताक्षर किए जिससे एक ही दिन में 40 लाख गुलामों को आज़ादी मिल गई। और इसका रिजल्ट था civil war जहाँ आधे मिलियन लोग मारे गये और इतने ही विकलांग हो गए, ठीक है?

खैर आप कह सकते हैं कि यह आज़ादी की कीमत है, कोई समस्या नहीं है। लेकिन इस्लाम ने इसे कैसे किया? तो अगर आप अमेरिका में whites और blacks के रिश्ते के बीच पर गौर करें तो। आप पाएगे गुलामी खत्म किए जाने के 150 साल बाद। लेकिन हमारे देशों में, whites और blacks के बीच कोई समस्या नहीं है। क्यों? क्योंकि इस्लाम ने इसे जिस तरीके से ख़त्म किया इस्लाम ने मुसलमानों के दिलों में आज़ादी की मोहब्बत को पैदा किया। इस्लाम ने मुसलमानों को यह बताया कि गुलामी बहुत बुरी चीज है। इस्लाम चाहता है कि आप इसे ख़त्म करें, ठीक है। उदाहरण के लिए,आपने एक संकल्प तोड़ा। आप क्या करते हैं? गुलाम को आज़ाद , ठीक है..

आपने कुछ करने की कसम खाई, और आपको यह पता चला कि कुछ और भी बेहतर है, कोई बात नहीं। तो बेहतर क्या है गुलाम को आजाद करना ठीक है, आपने बिना किसी excuse के रमज़ान में रोजा तोड़ दिया। और प्रायश्चित के लिए, आपने एक गुलाम को आज़ाद किया। आपसे गलती से किसी की हत्या हो गई। आपका कार एक्सीडेंट हुआ और किसी की मौत हो गई। कोई बात नहीं। एक गुलाम को आज़ाद कर दो आप जानते है इसका मतलब क्या है? आपने गलती से किसी की जान ले ली। गलती से ध्यान दीजिए ठीक है। कोई बात नहीं। किसी बेजान को ज़िंदगी दीजिए। लेकिन आप किसी बेजान को भला ज़िंदगी कैसे दे सकते हैं?

एक ऐसे व्यक्ति को आज़ादी देकर जो आज़ादी से वंचित है। इसका मतलब इस्लाम में आज़ादी जीवन के बराबर है। इन तमाम आदेशों के ज़रिए, इस्लाम ने मुसलमानों के दिलों में आज़ादी की मोहब्बत पैदा की। इसका असर ये हुआ कि इस्लाम ने गुलामी खत्म कर दिया जो समाज में जड़ जमा चुकी है, लेकिन धीरे-धीरे। लोगों ने ये काम मर्ज़ी से किया। और इसीलिए जब कईग़ुलाम आज़ाद किये गए, वो अपने मालिकों को छोड़ना नहीं चाहते थे। और उन्होंने कहा कि,मैं आज़ाद हूँ लेकिन में जाना नही चाहता तो गुलाम शब्द, कुछ ही सालों में, लगभग ख़त्म हो गया और फिर एक नया शब्द आया जिसे कहते हैं Mawali। इसका मतलब होता है — पूर्व ग़ुलाम या पूर्व मालिक। तो Salim Mawali Abu Hudhaifa इसका अर्थ है Abu Hudhaifa का पूर्व ग़ुलाम, लेकिन Abu Hudhaifa Mawali Salim भी, एक पूर्व मालिक है। उनकी उपाधि एक ही है। और यह है हैरान करने वाली बात। और लोग अक्सर हमसे कहते हैं कि, "आपने गुलामी पर रोक नहीं लगाई, आपने गुलामी को खत्म नहीं किया।" माफ़ कीजिए?

आप भी गुलामी को खत्म कीजिए हमारी तरह। जब लोग गुलामी के बारे में सोचते हैं, तो उनके दिमाग़ में सबसे पहले अमेरिका की गुलामी का दौर आता है। जहाँ गुलामों के साथ बहुत सख्त सुलूक होता था, उनके हक छीन लिए जाते थे। लंबे घंटे, plantation में। यही हमारे मन में आता है। इस्लाम ने उस गुलामी को समाप्त किया। वास्तव में महत्वपूर्ण है। देखें, गुलामी एक संस्थान था। इस्लाम ने इसे आविष्कार नहीं किया। यह पहले से ही कई धर्मों, कई संस्कृतियों और कई देशों में भी था। सातवीं शताब्दी से भी पहले। तो उस व्यवस्था को इस्लाम ने बदल दिया, और "गुलामी" जैसी भाषा को छोड़कर एक नई सोच दी — कि ये हमारे दत्तक भाई हैं। ये हमारी दत्तक बहनें हैं। इसने अधिकार दिए, इसने न्याय दिया इन लोगों को, जिन्हें अब दत्तक भाई कहा जाता है। उनके साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया जाना चाहिए। जो कपड़े आप पहनते हैं, आपको उन्हें भी देने चाहिए। जो खाना आप खा रहे हैं, वही आपको उन्हें देना चाहिए। आप उनके साथ कठोर व्यवहार नहीं कर सकते, आप उन पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ नहीं डाल सकते। और इतने सारे अलग-अलग तरीके हैं कि अगर वो कहें, क्या आप हमें आज़ादी दे सकते हैं?" तो अगर वे इसके लिए अनुरोध करें, तो एक अच्छा मुसलमान उन्हें आज़ादी दे देगा। अगर मुसलमान क़सम तोड़ता है, तो उसे गुलामों को आज़ाद करना होगा, है ना?

गुलामों को आज़ाद करने के बाद, उन्हें शिक्षा दी गई। उन्हें सशक्त बनाया गया। उन्हें ऊँचे पद दिए गए, उन्हें सम्मान दिया गया, और अब उनके साथ भी किसी अन्य व्यक्ति की तरह ही व्यवहार किया जाता है। तो क्योंकि अमेरिका में जब गुलामों को आज़ादी मिली, तो उनके साथ ऐसा नहीं हुआ, इसीलिए आज भी, अफ़सोस की बात है कि हम उस दौर के अवशेष देख सकते हैं...

शिकागो का दक्षिणी भाग, उदाहरण के लिए, डेट्रॉइट क्षेत्र। आप जानते हैं, अफ़्रीकी भाइयों और बहनों के लिए या अश्वेत भाइयों और बहनों के लिए, उनके पास अभी भी उसी तरह के सांस्कृतिक अधिकार नहीं हैं। वो वंचित हैं, उनके साथ भेदभाव किया जाता है। लेकिन इस्लाम में, इस्लाम ने गुलामों को आज़ाद किया और फिर उन्हें सशक्त बनाया। तो हम देख सकते हैं, अल्हम्दुलिल्लाह कि यह मानवता के लिए कितना बड़ा वरदान है। मेरे ईसाई भाइयों और बहनों और बाकी सभी लोगों के लिए, आप जानते हैं कि हमारे पास जीने के लिए सिर्फ एक ही ज़िंदगी है। बहुत जल्द सभी को मरना है। हम अल्लाह के सामने, ईश्वर के सामने खड़े होंगे। उस वक्त तक बहुत देर हो चुकी होगी, हमारे लिए वापस लौटने की, और फिर सही धर्म या सही समझ को अपनाने की। मेरी गुज़ारिश अपने ईसाई भाइयों और तमाम इंसानों से यही होगी कि क़ुरआन की एक प्रति उठाइए, और सिर्फ़ जानकारी के लिए ही सही, उसे पढ़िए। और आपको वहाँ ईश्वर की सही अवधारणा मिलेगी जो सभी पैगंबरों द्वारा दिया गया था। आप पाएंगे जीवन का उद्देश्य, जिसे अल्लाह ने कुरान में परिभाषित किया है। आपको इस्लाम में आपके समस्याओं का समाधान मिलेगा, नस्लवाद के बारे में, हत्या और आत्महत्या के बारे में और family structure के टूटने के बारे में। इस्लाम, मज़बूत परिवार, मज़बूत नैतिकता और माता-पिता को सम्मान देता है। बच्चे माता-पिता का सम्मान नहीं कर रहे हैं। Drugs का दुरुपयोग हो रहा है। सैन फ्रांसिस्को में फेंटानिल का दुरुपयोग हो रहा है। वहाँ बेघर लोग हैं। वहाँ गरीबी है। नस्लवाद बड़े पैमाने पर है, drugs का दुरुपयोग। इसका समाधान क्या है?

इस्लाम एक perfect solution, Just solution, practical solution देता है। इन सभी समस्याओं के लिए। हमें इसकी जरूरत है, इस्लाम इसे देता है और आपको इसकी ज़रूरत है। तो अंततः जब आप ईश्वर के सामने खड़े होंगे, आप यहाँ वापस नहीं आ सकते। और आप जानते हैं क्या? "मुझे इस्लाम को अपना लेना चाहिए था।" आपके पास केवल एक ही जीवन है। क़ुरआन पढ़ें और आपको आपके सवालों के जवाब मिल जाएंगे। यह आपको शांति देगा। यह आपको समाधान देगा। यह आपको निजात का रास्ता दिखाएगा। और ईश्वर से प्रार्थना करें। "हे ईश्वर, मुझे सत्य दिखाएँ। मुझे सत्य की ओर मार्गदर्शन करें।'" इंशाल्लाह, अल्लाह आपका सत्य की ओर मार्गदर्शन करेंगे। अल्लाह आपको इस्लाम की ओर मार्गदर्शित करेंगे।